अभिषेक शर्मा, ग्वालियर। Cashless Health Insurance: यदि आपके पास स्वास्थ्य बीमा है तो भी कोरोना से डरो, क्योंकि बीमा कार्डधारकों को निजी अस्पताल भर्ती करने को तैयार नहीं हैं। उन्हें गेट से ही लौटाया जा रहा है। केवल कैश होने पर ही आपको निजी अस्पतालों में इलाज मिल सकता है, जबकि सरकारी अस्पतालों में मरीज बढ़ने के बाद व्यवस्थाएं चरमरा चुकी हैं। निजी अस्पतालों की मनमानी के चलते कैशलेस सुविधा पूरी तरह हेल्पलेस हो चुकी है। एक बीमा कंपनी के मैनेजर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्वास्थ्य बीमा में डिस्पोजेबल और फूड का क्लेम शामिल नहीं होता है। इधर कोविड मरीजों के इलाज में निजी अस्पताल पीपीई किट, डिस्पोजेबल बेड शीट, मास्क, सैनिटाइजर, चाय और खाने का ढाई हजार रुपये प्रतिदिन तक जोड़ते हैं। क्लेम में यह राशि नहीं मिलने पर पैसा मरीज से वसूला जाता है। ऐसे में निजी अस्पताल मरीज से डिपोजिट के नाम पर 20 से 50 हजार रुपये तक पहले ही जमा करा रहे हैं। डिस्चार्ज के समय डिपोजिट में से यह राशि काट ली जाती है। निजी अस्पतालों में 50 से ज्यादा मरीज बीमा कार्डधारक भर्ती हो रहे हैं। इनके दस्तावेज और क्लेम प्रोसेस करना होता है, जिसके लिए इनके पास एक या दो व्यक्ति ही होते हैं, इसलिए ये कैशलेस कार्डधारक मरीजों को इलाज देने से मना कर रहे हैं।

बीमा कंपनी और अस्पताल के बीच उलझ रहे मरीज

सोमवार को एक कोरोना संक्रमित युवक ने बताया कि उनके साथ उनकी मां की रिपोर्ट भी पॉजिटिव आई थी। दोनों का स्वास्थ्य बीमा था। बीमा कंपनी से बात की तो अपोलो स्पेक्ट्रा, कल्याण मेमोरियल और सिम्स अनुबंधित होना बताया गया। जब अस्पतालों में भर्ती होने के लिए बात की तो कैशलेस सुविधा देने से मना कर दिया। इसके बाद सिम्स में 1 लाख रुपये डिपॉजिट कर भर्ती किया गया। जब बीमा कंपनी में शिकायत करना चाहा तो कंपनी ने कहा कि आप अपनी शिकायत रजिस्टर्ड करा दें। पीड़ित का कहना है कि शिकायत पहुंचने तक भर्ती हुए बिना तो नहीं रह सकते हैं। मुश्किल वक्त में भी बीमा काम न आए तो कराने का क्या फायदा?

कैशलेस कार्ड के बारे में बताया तो बोले- हम बिल दे देंगे, आप क्लैम सेटल करा लेना

रिपोर्टर : कोविड पॉजिटिव रिपोर्ट आई है, आपके यहां बेड खाली है?

होटल शेल्टर (अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल) : बेड हैं, आप आ जाइए।

होटल सिल्वर ओक (कृष्णा हॉस्पिटल) : बेड है, आप आ जाएं।

होटल एंबिएंस (केएम एंड केडीजे हॉस्पिटल) : आप होटल एंबिएंस आ जाओ।

रिपोर्टर : मेरे पास बीमा पॉलिसी है, कैशलेस सुविधा मिलेगी क्या?

अपोलो हॉस्पिटल : अभी कैशलेस सुविधा नहीं दे रहे। आपको बिल उपलब्ध करा देंगे, आप क्लेम सेटल कर लेना।

कृष्णा हॉस्पिटल : इन कंपनियों पर हम कैशलेस नहीं दे सकते हैं।

केएम एंड केडीजे : स्टार हेल्थ में कैशलेस सुविधा नहीं दे सकेंगे (जबकि स्टार हेल्थ की वेबसाइट पर कल्याण व केडीजे हॉस्पिटल अनुबंधित में दर्शाता है)। मैक्स का कार्ड भेजिए फिर देखते हैं।

रिपोर्टर : कितने रुपये जमा करने होंगे?

अपोलो हॉस्पिटल : 20 हजार रुपये सिक्योरिटी डिपॉजिट होगा। रूम और खाने के चार्ज 7500 रुपये प्रतिदिन होगा। दवा, डॉक्टर विजिट और अन्य मेडिकल खर्चे अलग से होंगे।

कृष्णा हॉस्पिटल : 20 हजार रुपये सिक्योरिटी व 5500 रुपये रूम व खाने के होंगे। डॉक्टर विजिट, दवा आदि का अतिरिक्त चार्ज होगा।

केएम एंड केडीजे : 50 हजार रुपये डिपोजिट और हर दिन का 7500 रुपये रूम चार्ज और 999 रुपये खाने का होगा। डॉक्टर विजिट के 1500, जांच और मेडिसिन के चार्ज अलग रहेंगे।

(नोट : बीआइएमआर और सिम्स मल्टीस्पेशियिलिटी में रूम खाली नहीं थे।)

निजी अस्पतालों का कहना

अभी हमारा अनुबंध सिर्फ आदित्य बिरला से है। बिरला एचडीएफसी से इसकी प्रक्रिया चल रही है, जो तीन-चार दिन में हो जाएगी। अन्य कंपनियों के कैशलेस हम नहीं ले रहे हैं। डॉ. तपश शर्मा, कृष्णा हॉस्पिटल

जिन कंपनियों से अनुबंध है,उनके लिए कैशलेस सुविधा दे रहे हैं। स्टार हेल्थ के साथ थोड़ी परेशानी आ रही है, इसलिए उसके कैशलेस मरीज नहीं ले रहे हैं। क्लेम कम आने से मरीज परेशान होता है। - डॉ. पुरेंद्र भसीन, संचालक, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्टिपल

हॉस्पिटल में कैशलेस सुविधा देने पर कोई परेशानी नहीं है। जिन होटल में कोविड सेंटर बनाया है, उनमें कैशलेस में थोड़ी परेशानी आ रही है। कई बार मेडिसिन या इंजेक्शन का क्लेम कम आता है।- सौरभ सिंह, एडमिन, कल्याण मेमोरियल एंड केडीजे हॉस्पिटल

हमारी कंपनी से बीमा कराने वाले मरीजों को अनुबंध वाले अस्पतालों में भर्ती किया जा रहा है। यदि कोई अस्पताल मना करता है तो यह गलत है। हम सभी क्लेम और क्वेरी को जल्द से जल्द प्रोसेस कर सेटल कर देते हैं। - पंकज सप्रा, सीनियर सेल्स मैनेजर, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस

इरडा (आइआरडीए) को करें बीमा कंपनी की शिकायत

यदि बीमा कंपनी नियम के मुताबिक सर्विस नहीं देती है तो कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत शिकायत कर सकते हैं। बीमा कंपनी के खिलाफ बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (इरडा) में शिकायत की जा सकती है। इसके लिए पहले बीमा कंपनी के ग्रेव्येंस रिड्रेसल ऑफिसर (जीआरओ) के पास लिखित शिकायत दर्ज कराएं। यदि निर्धारित समय अवधि (सामान्यत: 15 दिन) में जीआरओ से संतुष्ट जवाब नहीं मिलता है तो आप इरडा के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं। शिकायत करने के साथ टोल फ्री नंबर 18004254732 पर कॉल कर सकते हैं। - मुकेश गुप्ता, एडवोकेट

Posted By: Prashant Pandey

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