बलबीर सिंह,(ग्वालियर नईदुनिया)। मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने प्रदेश में सत्र 2019-20 में 520 कालेजों को संबद्धता दी थी। इन कालेजों में ग्वालियर के 35 कालेज भी शामिल हैं। 35 में से एक कालेज की संबद्धता के रिकार्ड की जांच कराई गई। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने रिकार्ड की जांच कर गड़बड़ियां हाई कोर्ट में बताई हैं। संबद्धता के पूरे मामले को सीबीआइ के सुपुर्द करने की तैयारी है। इसको लेकर बुधवार को चिकित्सा शिक्षा विभाग के डीएमई, इंडियन नर्सिंग काउंसिल के सचिव व सीबीआइ के एक अधिकारी को तलब किया है। इन्हें आज न्यायालय में उपस्थित रहना होगा। सभी को अपना पक्ष रखना है। यदि कोर्ट इस मामले को सीबीआइ के सुपुर्द करता है तो एमपी नर्सिंग काउंसिल, मेडिकल यूनिवर्सिटी जबलपुर व स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की मुश्किल बढ़ सकती है। क्योंकि हर स्तर पर कालेजों को मान्यता व संबद्धता देने में गड़बड़ी मिली है। सीबीआइ के अधिवक्ता राजू शर्मा को सीबीआइ अधिकारी के साथ उपस्थित होना है। दोपहर ढाई बजे के बाद नर्सिंग कालेज की याचिकाओं की सुनवाई की जाएगी। इस सुनवाई को यू ट्यूब पर लाइव भी देख सकते हैं।

अंचल के 36 कालेजों ने शिक्षण सत्र 2019-20 के विद्यार्थियों का नामांकन कराकर परीक्षा कराने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने इन कालेजों का रिकार्ड मंगवाया तो काफी गड़बड़ी मिली। गत दिवस भोपाल के अतिरिक्त पुलिस कमिश्नर शैलेंद्र सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल से संबद्धता का रिकार्ड जब्त कर हाई कोर्ट में पेश किया था। कोर्ट ने अतिरिक्त महाधिवक्ता एमपीएस रघुवंशी को निर्देशित किया कि कालेजों के रिकार्ड का अवलोकन करें और वास्तुस्थिति से कोर्ट को अवगत कराएं। सैंपल के रूप में चरक इंस्टीटयूट आफ नर्सिंग कालेज के रिकार्ड का अवलोकन किया। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने रिकार्ड देखने के बाद बताया कि शैक्षणिक, हास्टल, हास्पिटल सहित ट्रेनिंग में नियमों का पालन नहीं किया गया। नियमों की अनदेखी कर कालेजों को संबद्धता दी गई है। सुनवाई के दौरान मप्र नर्सिंग काउंसिल के प्रशासक डा योगेश उपाध्याय मौजूद रहे। सीबीआइ के अधिवक्ता राजू शर्मा को निर्देशित किया है कि 28 सितंबर को सीबीआइ का अधिकारी मौजूद रहे।

कोर्ट ने कहा-ये बिना ट्रेनिंग के अस्पतालों में सेवाएं देंगेः

-हाई कोर्ट ने इन कालेजों से पास होकर निकलने वाले विद्यार्थियों के कार्य पर चिंता जताई है। जब इन्हें मेडिकल की जानकारी नहीं है। ऐसे छात्र नर्स बनकर अस्पतालों में सेवाएं देते हैं तो मरीजों की जान के साथ खिलवाड़ है। यदि आपरेशन थियेटर में काम कराया जाता है तो क्या स्थिति बनेगी। यह मरीजों के साथ धोखा है।

-मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल ने सत्र 2019-20 में प्रदेश में 520 नर्सिंग कालेजों को संबद्धता दी है। एक कालेज के रिकार्ड के अवलोकन में प्राथमिक गड़बड़ी दिख रही है। शेष कालेजों की भी इसी तरह की स्थिति है।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close