ग्वालियर। हाईकोर्ट की एकल पीठ में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के एक बयान को लेकर पुलिस ने स्थिति स्पष्ट कर दी। बयान में कहा था कि प्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट (एससी-एसटी एक्ट) में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी।

एसपी ने शपथ पत्र में कहा कि एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच को लेकर कोई प्रशासनिक आदेश नहीं है। सीएम के बयान का कोई विधिक महत्व नहीं है। एक्ट के प्रावधानों के अनुसार ही आरोपित की गिरफ्तारी और कार्रवाई होगी।

इसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता विशाल मिश्रा व शासकीय अधिवक्ता ने यह कहते हुए कोर्ट से समय मांगा कि शासन से दिशा-निर्देश लेना है और नया जवाब पेश करना है। हाईकोर्ट में इस मामले को लेकर तीन बार सुनवाई हो चुकी है। अब शासन से मुख्यमंत्री के बयान पर जवाब मांगा है। 11 अक्टूबर को फिर से सुनवाई होगी।

हाईकोर्ट ने स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत अतेन्द्र सिंह रावत ने छेड़छाड़ व एट्रोसिटी एक्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता अतुल गुप्ता ने तर्क दिया कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बालाघाट में एक सभा के दौरान एट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया था।

उन्होंने कहा था कि प्रदेश में एट्रोसिटी एक्ट में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी। यह बयान अखबारों में भी प्रकाशित हुआ था, लेकिन पुलिस मुझे गिरफ्तार करना चाहती है, जबकि पूरा केस झूठा है। यह तर्क सुनकर कोर्ट ने 1 अक्टूबर को जवाब मांगा क्या सीएम ने ऐसा बयान दिया है। पुलिस अधीक्षक स्तर के अधिकारी शपथ पत्र पेश करें और एक्ट के संबंध में अपनी स्थिति स्पष्ट करें। गुरुवार को शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक ने अपना शपथ पत्र पेश किया।

शपथ पत्र में कहा कि मुख्यमंत्री ने बालाघाट की सभा में यह बयान दिया था, लेकिन उनके बयान का कानून में महत्व नहीं है। एट्रोसिटीज एक्ट में गिरफ्तारी से पहले जांच नहीं की जाएगी। एक्ट के मुताबिक ही कार्रवाई की जाए। जब कोर्ट ने सवाल किए तो अतिरिक्त महाधिवक्ता बैकफुट पर दिखे। ज्ञात हो कि सवर्ण वर्ग के विरोध को देखते हुए 20 सितंबर को मुख्यमंत्री ने एट्रोसिटी एक्ट को लेकर बयान दिया था कि प्रदेश में बिना जांच के गिरफ्तारी नहीं होगी। इस बयान की सत्यता पर बहस छिड़ गई थी।

एक दिन में तीन बार सुनवाई

हाईकोर्ट में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो कोर्ट ने पहले ही कह दिया कि तारीख नहीं बढ़ाई जाएगी। शा. अधिवक्ता ने पुलिस अधीक्षक शिवपुरी का शपथ पत्र पेश कर दिया। उसको लेकर मुख्यमंत्री का बयान झूठा साबित हो रहा था। इसके बाद अतिरिक्त महाधिवक्ता ने समय लिया कि संशोधित जवाब पेश करना चाहते हैं।

दोपहर 2:30 बजे केस फिर से लिस्ट किया गया। इस बार मामले की सुनवाई कोर्ट की बजाए न्यायमूर्ति के केबिन में की गई। अतिरिक्त महाधिवक्ता ने कहा कि शासन से दिशा-निर्देश ले रहे हैं। शाम 4:30 बजे मामले को सुना गया। कोर्ट को बताया कि महाधिवक्ता मुख्यमंत्री से इस संबंध में बात कर रहे हैं। शासन का नया जवाब पेश करेंगे।

क्या है मामला

-अतेन्द्र सिंह रावत शिवपुरी जिले के करैरा स्वास्थ्य केन्द्र में तकनीशियन के पद पर कार्यरत है। वहीं कार्यरत एक महिला ने उन पर अगस्त 2018 में करैरा थाने में छेड़छाड़ व एट्रोसिटी एक्ट के तहत केस दर्ज करा दिया। उसका आरोप था कि वेतन देने के बदले में वह अनैतिक संबंध बनाना चाहता है। अगस्त 2017 में अनैतिक संबंध बनाने की बात भी कही।

- अतेन्द्र का जुलाई 2017 में करैरा से सागर स्थानांतरण हो चुका था, उसी महीने रिलीव भी कर दिया। उसने याचिका में तर्क दिया कि वेतन जारी करने को लेकर अनैतिक संबंध बनाने का आरोप लगाया है, लेकिन उसके पास कोई फायनेंशियल पावर नहीं हैं। महिला को हर महीने वेतन मिला है। उसने एक साल बाद झूठा केस दर्ज कराया है।

क्या है धारा 18 ए

-सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संसद ने एट्रोसिटी एक्ट में संशोधन किया था। 17 अगस्त को केन्द्र सरकार ने नए संशोधन की अधिसूचना जारी कर दी थी। धारा 18 ए लागू की गई है।

- 18 ए के अनुसार एट्रोसिटी एक्ट में केस दर्ज होने के बाद किसी भी तरह की प्राथमिक जांच नहीं की जाएगी न जांच अधिकारी को आरोपित की गिरफ्तारी करने से पहले किसी वरिष्ठ अधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

- सीआरपीसी की धारा 438 लागू नहीं होगी। अगर किसी व्यक्ति के ऊपर गैर जमानती धारा के तहत केस दर्ज हो जाता है तो वह अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर करता है। हाईकोर्ट को सुनने का अधिकार है, लेकिन एट्रोसिटी एक्ट के तहत यह धारा लागू नहीं की गई है।

- इन्हीं प्रावधानों के अनुसार आरोपित पर कार्रवाई होगी।

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