ग्वालियर। Cold Weather ठंड बढ़ने के साथ ही हृदय रोगियों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत बढ़ोत्तरी हो गई है। हर दिन 12 से 15 मरीज इमरजेंसी में जेएएच के कार्डियोलॉजी विभाग में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। इस मौसम में ब्लड में सिब्रोनोजन पदार्थ की मात्रा बढ़ जाती है, जो खून को गाड़ा कर देता है। इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। साथ ही वायु प्रदूषण भी अहम कारण बना हुआ है। सड़कों पर उड़ती धूल, कचरा जलने व फैक्ट्री तथा डीजल वाहनों से निकलने वाला काला धुआं और हवा में नमीं से स्मॉग बनाता है। यह सर्द मौसम में सांस रोगियों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। फूलबाग पर लगी स्क्रीन पर दिन में प्रदूषण के आंकड़े 200 (एक्यूआई) के आसपास होता है। वहीं रात में यह आंकड़ा तीव्रता से बढ़ जाता है। रविवार को दिन में पीएम 10 का मान 221और पीएम 2.5 का मान 132 दर्ज किया गया, जो निर्धारित मानक से दो गुना से भी अधिक था।

रात में जगह-जगह जलने लगा कचरा

ठंड से बचने के लिए लोग रात में जगह-जगह कचरा, टायर, कोयला या फिर लकड़ी जला लेते हैं, जो पर्यावरण के लिए हानिकरक है। दिल्ली में जहां प्रदूषण बोर्ड के अफसर रात में गश्त कर अलाव या फिर कचरा जलाने वालों पर अंकुश लगा रहे हैं वहीं ग्वालियर में आबोहवा को शुद्ध रखने वाले जिम्मेदार नींद में हैं।

कागजों में डस्ट फ्री, हकीकत में उड़ती धूल

प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड द्वारा पिछले साल 15 सड़कों (गांधी रोड, रेसकोर्स रोड, सिटी सेंटर रोड, थीम रोड, गैंडेवाली सड़क, तानसेन नगर रोड आदि) को डस्ट फ्री बताया गया था। लेकिन हकीकत में शहर की एक भी सड़क डस्ट फ्री नहीं है। सड़कों पर उड़ती धूल व धुआं से शहरवासी परेशान हैं।

हृदय रोग के प्रमुख तीन कारण

हृदयरोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत रस्तोगी ने बताया कि हृदयघात के प्रमुख तीन कारण हैं

- ठंड में शरीर से पसीना न आने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

- ठंड में लोग तले हुए खाने का अधिक सेवन करने लगते हैं।

- शरीर में पाया जाने वाला सिब्रोनोजन नाम का पदार्थ ब्लड में बढ़ जाता है, जिससे खून गाड़ा होने लगता है।

रोकथाम के उपाय

- सुबह के समय 15 डिसे से कम टेम्प्रेचर पर हृदयरोगी व 65 साल से अधिक उम्र वाले सैर पर न निकलें।

- हृदय, मधुमेह रोगी नियमित दवा का सेवन करें।

- तला हुआ भोजन का कम सेवन करें तथा निर्धारित मात्रा से अधिक खाना न खाएं।

- सुबह-शाम योगा करें व सर्दी से बचने के लिए सावधानी बरतें।

बदलता मौसम अधिक घातक

डॉ. पुनीत रस्तोगी का कहना है कि हृदयघात की समस्या बदलते मौसम में अधिक होती है। इस समय सर्दी व गर्मी का मिलाजुला असर होता है। तब लोग एतिहात बरतना कम कर देते हैं, जो घातक हो सकता है।

पॉल्यूशन व स्मोकिंग घातक

हवा में ठंडक के कारण धूल व धुंआ के कण जमीन के ऊपरी हिस्सा में ही वेरिएट करते हैं। यह कण आसमान में नहीं जा पाते जिससे लोगों को सांस संबंधी व बीपी की समस्या बढ़ जाती है। सर्दी में लोग स्मोकिंग, तला खाने का सेवन बढ़ा देते हैं, जो घातक होता है। इस पर अंकुश लगाना ही सेहत के लिए लाभदायक है।

डॉ गौरव कवि, सहायक प्राध्यापक कार्डियोलॉजी जीआरएमसी

Posted By: Nai Dunia News Network

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