- धनेली गांव में हरसी हाई लेवल नहर की शाखा निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण का है मामला

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। अपर सत्र न्यायालय ने भूमि अधिग्रहण के मुआवजे में बदलाव किया है। प्रशासन ने 20 लाख प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दिया था। भूमि को असिचिंत बताया था, लेकिन कोर्ट ने मुआवजे की राशि में 10 लाख वृद्धि करते हुए 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा राशि अदा करने का आदेश दिया है। साथ ही 9 फीसद ब्याज भी अदा करना होगा।

ग्राम धनेली में हरसी हाई लेवल नहर की शाखा का निर्माण किया गया था। इस शाखा के निर्माण के लिए जिला प्रशासन ने वर्ष 2013 में भूमि का अधिग्रहम किया था, लेकिन यहां किसानों को जो मुआवजा दिया जा रहा था, बाजार मूल्य से कम अदा किया। बालकिशन, टिल्लू, पातीराम की 3.15 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया। इस जमीन का बाजार मूल्य 25 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर था और भूमि सिचिंत थी, लेकिन प्रशासन ने 20 लाख्ा रुपये का मुआवजा तय कर भूमि का अधिग्रहण कर लिया। नहर की शाखा का निर्माण हो गया। बालकिशन, टिल्लू व पातीराम ने जिला न्यायालय में अधिग्रहम के आदेश को चुनौती दी। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि जिला प्रशासन ने कम मुआवजा दिया। प्रशासन की ओर से तर्क दिया गया कि जब भूमि अधिग्रहित की जा रही थी, तब कोई आपत्ति नहीं की। आपत्ति के संबंध में कोई दस्तावेज न्यायालय में पेश नहीं किया। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुआवजा राशि में बदलाव किया है। 20 लाख की जगह 30 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर के हिसाब से मुआवजा देना होगा।

फर्जी तरीके से ऋण लेने वाले आरोपित को तीन साल की सजा

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने फर्जी तरीके से ऋण लेने वाले योगेंद्र गुप्ता को तीन साल की सजा सुनाई है और पांच हजार रुपये का अर्थदंड लगाया है। अपर लोक अभियोजक घनश्याम मंगल ने बताया कि जीसीएम कंट्रक्शन ने योगेंद्र गुप्ता को लेनदेन के लिए अधिकृत किया था। वर्ष 2003 में उन्होंने दो बार में 10-10 लाख रुपये का ऋण लिया। कुल ऋण 20 लाख का लिया गया। इस फर्म की साझेदार गोमतीबाई का निधन हो गया। उसके निधन होने के बाद फर्म का विघटन हो गया। जब विघटन हुआ तो योगेंद्र गुप्ता ने जो ऋण लिया, उसका राजफाश्ा हो गया। विघटन के समय 15 लाख फर्म पर ऋण बकाया था। इसकी शिकायत कोतवाली थाने में हुई। पुलिस ने योगेंद्र गुप्ता, ओमप्रकाश गुप्ता, ममता गुप्ता, इंदु गुप्ता को आरोपित बनाया। गवाही व साक्ष्य के आधार पर तीन आरोपितों को कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया, लेकिन योगेंद्र गुप्ता को इस फर्जीवाड़े के लिए दोषी मानते हुए तीन साल की सजा सुनाई है।

Posted By: anil tomar

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