Constitution Day 2022: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। देश के अलग-अलग शहरों में रखी संविधान की 16 मूल प्रतियों में से एक को ग्वालियर में अब डिजिटली पढ़ा जा सकता है। महाराज बाड़ा स्थित केंद्रीय पुस्तकालय में रखी भारत के संविधान की मूल प्रति को स्मार्ट सिटी ने डिजिटलाइज किया है। इस प्रति को पुस्तकालय में लगी बड़ी टच स्क्रीन के माध्यम से एक-एक पेज पलटकर पढ़ा जा सकता है।

वर्ष 29 अगस्त 1947 को संविधान की ड्राफ्टिंग कमेटी का गठन हुआ। 26 नवंबर 1949 को पूर्ण रूप से संविधान तैयार हुआ और 26 जनवरी 1950 को इसे देश में लागू किया गया। संविधान की इस मूल प्रति को 31 मार्च 1956 को ग्वालियर लाया गया था। इसके आवरण पृष्ठ पर स्वर्ण अक्षर अंकित हैं। प्रति में कुल 231 पेज हैं। इतना ही नहीं संविधान सभा के 285 सदस्यों के मूल हस्ताक्षर भी इस प्रति में मौजूद हैं।

16 मूल प्रतियों में से यह एक होने के कारण केंद्रीय पुस्तकालय में इसे सहेजकर रखा जाता था और अक्सर लोगों को दिखाने में आनाकानी की जाती थी। स्मार्ट सिटी ने विशेष परियोजना के तहत इस मूल प्रति को डिजिटल कर दिया है। अब पुस्तकालय में लगी बड़ी स्क्रीनों पर सिर्फ हाथ के इशारे से संविधान के पन्नाों को पलटकर पढ़ा जा सकता है।

इसके लिए स्मार्ट सिटी ने विशेषज्ञों के माध्यम से संविधान की प्रति के एक-एक पन्नो को हाइ डाट्स पर इंच (डीपीआइ) पर स्कैन किया गया। प्रत्येक पन्नो को दो-दो बार स्कैन किया गया। इसके बाद इसे आपस में मर्ज किया गया, ताकि कहीं भी कोई मिस प्रिंटिंग न रह जाए। वर्षों पुरानी प्रति होने के कारण यह भी ख्याल रखा गया कि स्कैनिंग की प्रक्रिया के दौरान इसे कोई नुकसान नहीं पहुंचे। फिर इसे साफ्टवेयर के माध्यम से इंटरेक्टिव स्क्रीन पर डिस्प्ले किया गया है।

सिर्फ तीन दिन दिखाते थे मूल प्रति

संविधान की मूल प्रति के डिजिटलाइज होने का लाभ यह है कि अब सालभर लोग इसे देख सकते हैं। इससे पहले साल में सिर्फ तीन दिन 26 जनवरी, 15 अगस्त और 26 नवंबर यानी संविधान दिवस के दिन ही मूल प्रति को आम जनता के लिए एक शो-केस में रखा जाता था। हालांकि आज भी पुस्तकालय में यह मूल प्रति लोगों के लिए उपलब्ध रहेगी, लेकिन ज्यादातर लोग इसके डिजिटल वर्जन को देखना पसंद कर रहे हैं। इसका कारण है कि मूल प्रति को वे हाथ नहीं लगा सकते हैं, लेकिन डिजिटल प्रति को वे जूम कर आसानी से पढ़ सकते हैं।

लोग डिजिटल वर्जन पसंद कर रहे हैं

संविधान की मूल प्रति को लोग साल में सिर्फ तीन दिन ही देख पाते थे, लेकिन अब सालभर देख सकेंगे। सभी प्रति का डिजिटल वर्जन पसंद कर रहे हैं। 100 इंच की स्क्रीन पर वे इसे जूम कर भी पढ़ सकते हैं। शनिवार को लोग सुबह 11 से शाम चार बजे तक मूल प्रति देख सकते हैं।

विवेक कुमार सोनी, पुस्तकालय प्रबंधक, केंद्रीय पुस्तकालय

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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