ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि। Corona virus effect कोरोना वायरस की दहशत पूरी दुनिया में फैल चुकी है। विदेश से आने वालों को विशेष निगरानी में रखा जा रहा है। लोग स्वास्थ्य एजेंसियों के पास जाने की जगह बचकर भाग रहे हैं। जिससे बीमारी फैलने का खतरा बढ़ रहा है। विदेश से आने वाले कुछ लोग जब ग्वालियर आए तो उनको भी क्वारंटाइन पीरियड से गुजरना पड़ा। शुरूआत में तो कोरोना का नाम सुनते ही वह भी घबरा गए, मगर एजेंसियों के साथ सहयोग किया। खुद को आइसोलेशन में रखा और अब वह पूरी तरह स्वस्थ्य हैं।

पहले घबरा गया, अस्पताल गया तो नहीं मिला रिस्पॉन्स

मैं अजय ठाकुर(परिवर्तित नाम) उम्र 21 साल चीन के शियांग में मेडिकल की पढ़ाई कर रहा हूं। 14 जनवरी को मैं वैकेशन शुरू होने पर ग्वालियर थाटीपुर स्थित अपने घर लौटा था। उस समय मैं ही पहला व्यक्ति था जो चीन से भारत आया था। 18 जनवरी से चीन के वुहान शहर में कोरोना वायरस के मरीज मिलना शुरू हो गए थे। मुझे जब सर्दी जुकाम हुआ तो कुछ घबरा गया। फिर खुद को हिम्मत बंधाई और अपने भाई को साथ लेकर जिला अस्पताल मुरार पहुंचा। यहां पर डॉक्टरों की तरफ से रिस्पॉन्स नहीं मिला। मेरे भाई ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में फोन करके ट्रैवल हिस्ट्री की जानकारी दी तो उन्होंने हमारी काफी मदद की। मुझे जेएएच जाने के लिए कहा गया, जहां मैं तीन दिन तक आइसोलेट वार्ड में रहा था। रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद मुझे घर भेज दिया गया। मगर मैंने एहतियात के तौर पर खुद को आइसोलेट करके रखा। 14 दिन के क्वारंटाइन पीरियड में मैंने लोगों से दूरी बनाकर रखी। इस समय का मैंने सदुपयोग किया और बंद कमरे में पढ़ाई में पूरा समय बिताया। साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों को भी सावधानी बरतने की समझाइश दी। मैं देख रहा हूं कि वॉट्सएप पर लोग ज्ञान दे रहे हैं कि अल्कोहल पीने से कोरोना दूर होता है। इस प्रकार के भ्रामक प्रचार से दूर रहें और यदि कोई भी लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। क्योंकि समय रहते उपचार मिलने से इस बीमारी से बचा ही नहीं जीता भी जा सकता है।

क्वारंटाइन पीरियड में परिवार से भी दूरी रखी

मैं जतिन कुमार(परिवर्तित नाम) चीन के बीजिंग शहर में एक स्कूल में एचओडी हूं। इसके अलावा भी मैं कई देशों में रह चुका हूं। 24 जनवरी को जब ग्वालियर में अपने डीबी सिटी स्थित निवास पर पहुंचा तो सभी काफी खुश थे। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग के समय मेरा मोबाइल नंबर दर्ज हुआ था। जैसे ही स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पहुंची तो खुशी गायब हो गई। जब कोरोना वायरस के चलते आइसोलेट करने की बात उठी तो परिजन भी कुछ घबरा गए। मैंने सभी को समझाया कि यह रूटीन प्रक्रिया है, इसमें घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बाद डॉक्टर की हिदायतों के अनुसार मैंने 14 दिन खुद को अलग कमरे में बंद कर लिया। इस अवधि में मैंने ऑनलाइन ही अपना पूरा कामकाज जारी रखा। इसी वजह से मेरा कोई भी काम प्रभावित नहीं हुआ। मेरा भोजन आदि इंतजाम कमरे में ही कर दिया गया था। साथ ही मैंने परिवार को भी समझाइश दी कि वह कहीं भी बाहर से आने पर हाथों को सैनिटाइज करें। साथ ही चीन के ग्रुप पर मैं लगातार अपडेट स्थिति भी लेता रहा, जहां मैंने चीन के बीमारी पर काबू पाने के प्रयासों पर विशेष ध्यान दिया। इन उपायों को मैंने घर पर भी करना शुरू किया। मेरा सभी से आग्रह है कि वह इस बीमारी से घबराएं नहीं, लेकिन सावधानी जरूर बरतें। स्वास्थ्य एजेंसियों का सहयोग करें, जिससे बीमारी की रोकथाम संभव हो सके।

सार्वजनिक समारोह में अभी भी मास्क पहनकर जाता हूं

मैं गिरीश बंसल(परिवर्तित नाम) सिंगापुर की यात्रा से करीब एक माह पहले ग्वालियर लौटा था। एयरपोर्ट पर स्क्रीनिंग होने के बाद मैं बेफिक्र था। जब अनुपम नगर स्थित निवास पर पहुंचा तो कुछ समय बाद ही स्वास्थ्य विभाग की टीम भी घर पहुंच गई। जब उन्होंने क्वारंटाइन वार्ड में रखने की बात कही तो मुझे असहज लगा। मैंने कहा कि मैं घर में ही आइसोलेट रहना पसंद करूंगा। स्वास्थ्य विभाग की टीम इस पर सहमत हो गई और मैंने खुद को ही 7 दिन तक कमरे में आइसोलेट करके रखा। शुरू में मास्क लगाना या बार-बार हाथों को सैनिटाइज करना बड़ा अजीब लगता था। मास्क से तो सांस लेने में भी मुश्किल होती थी। 7 दिन में जब कोई लक्षण दिखाई नहीं दिया तो मैंने परिजनों से मिलना जुलना शुरू किया। हालांकि 14 दिन तक मैं किसी भी सार्वजनिक स्थल पर नहीं गया। अब तो स्थिति ये है कि घर से बाहर भी निकलता हूं तो मास्क लगाकर ही जाता हूं। मेरा सभी से आग्रह है कि वह इस बीमारी से डरें नहीं, लेकिन सावधानी जरूर बरतें। मास्क का प्रयोग करें, बार-बार हाथ जरूर धोएं। इसके अलावा हाथ मिलाने की जगह नमस्ते करें।

Posted By: Nai Dunia News Network

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