केस 1 थाटीपुर निवासी 35 वर्षीय युवक की 19 सितंबर को रिपोर्ट पॉजिटिव आई और वह होम आइसोलेट हुआ। उन्होंने बताया कि प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से उन्हें दवाएं नहीं मिलीं। वॉट्सएप पर दवा की पर्ची मिली। खुद बाहर जा नहीं सकते इसलिए परिचित से दवा मंगवाना पड़ती है। चिकित्सकों का फोन भी दो-तीन दिन में एक बार आता है।

केस 2 कोटेश्वर क्षेत्र में पॉजिटिव आए 45 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि वे दो दिन से होम आइसोलेशन में हैं। निजी चिकित्सक से संपर्क कर दवाएं ले रहे हैं। प्रशासन से कोई दवा नहीं मिली है।

केस 3 मुरार निवासी 40 वर्षीय महिला की रिपोर्ट शनिवार को पॉजिटिव आई। कोरोना किट नहीं मिली, सिर्फ वॉट्सएप पर दवा के नाम भेज दिए। महिला को अपने स्तर पर दवा मंगवानी पड़ी। सिर्फ कॉल सेंटर से कॉल आता है, कोई चिकित्सक रोज फोन पर कंसल्ट नहीं करता है।

Coronavirus Gwalior News: ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। ये तो महज तीन उदाहरण हैं, लेकिन होम आइसोलेशन में रह रहे सैकड़ों कोरोना संक्रमित रोजाना इन परेशानियों से रूबरू हो रहे हैं। प्रशासन मरीज को होम आइसोलेट कर देता है और फिर उनकी सुध लेना भूल जाता है। होम आइसोलेट होने वाले कोरोना संक्रमितों को कोरोना किट, दवाएं उपलब्ध कराने के साथ चिकित्सक को नियमित फोन पर उनसे कंसल्ट करना होता है।

हालांकि ऐसा हो नहीं रहा है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार 1906 एक्टिव केस में से सिर्फ 588 मरीज ही अस्पतालों में भर्ती हैं। शेष मरीजों को होम आइसोलेट और होम क्वारंटाइन किया हुआ है। इस तरह से अभी शहर में 69 प्रतिशत कोरोना पॉजिटिव घरों में ही हैं।

सरकारी पर भरोसा नहीं, प्राइवेट में भर्ती होने को प्राथमिकता

सरकारी अस्पतालों के मुकाबले कोविड मरीज प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती होना या फिर होम आइसोलेट होना ही पसंद कर रहे हैं। सरकारी अस्पतालों में 1012 बेड पर सिर्फ 266 मरीज भर्ती हैं। इसमें से भी 126 मरीज तो सिर्फ सुपर स्पेशियलिटी में भर्ती हैं, जो अति गंभीर लक्षणों वाले हैं।

यदि सुपर स्पेशियलिटी को हटा दिया जाए तो सरकारी अस्पतालों की बेड ऑक्युपेंसी सिर्फ 16 प्रतिशत है यानी 84 प्रतिशत बेड खाली पड़े हुए हैं, जबकि प्राइवेट हॉस्पिटलों में बेड ऑक्युपेंसी 46 प्रतिशत है। इसके अलावा आइडिया कॉलेज, जैन हॉस्टल और आरएनएस कॉलेज को क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है, जिनमें 148 बेड हैं और ये पूरे खाली हैं।

यह है हॉस्पिटलों की स्थिति

बेड भर्ती मरीज खाली बिस्तर बेड ऑक्युपेंसी

सरकारी अस्पताल 1012 266 746 26%

निजी अस्तपाल 670 311 359 46%

Posted By: Hemant Kumar Upadhyay

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