Coronavirus in Gwalior : ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना देश विदेश में अपने कहर का डंका पिटवा चुका है। कोरोना ने सबसे अधिक बुजुर्गों को अपना शिकार बनाया, इनमें से कुछ ने कोरोना से जंग जीती तो कुछ हार गए। लेकिन जिले में अब तक महज 17 बुजुर्ग ही कोरोना की चपेट में आए। इनमें से 15 लोगों ने इस जंग को जीता है जबकि दो हार गए। खास बात यह है कि जिन लोगों ने जंग जीती उन्हें दिल की, मधुमेह, बीपी, पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी थी। इसके साथ ही इन बुजुर्गों के अन्य बीमारियों के चलते ऑपरेशन भी हो चुके थे। कोरोना की चपेट में आए बुजुर्गों ने अपनी हिम्मत,हौसला,नियमित जीवनचर्या से घर व अस्पताल में इलाज लेकर कोरोना को हरा दिया।

केस-1 : घोसीपुरा निवासी 63 वर्षीय नजमा मुंबई एक शादी में गई थी। लॉकडाउन के कारण शादी में शामिल नहीं हो सकीं। जब ग्वालियर आई तो मालूम चला कि कोरोना संक्रमित हैं। शुगर, बीपी, थायराइड सहित अन्य बीमारियों के कारण परिजन उनके स्वास्थ्य को लेकर खासे चिंतित थे। मगर नजमा ने हिम्मत नहीं हारी। उनको विश्वास था कि वह कोरोना पर जीत हासिल करेंगी, उन्होंने इसे कभी भी गंभीर रोग के रूप में नहीं लिया। जिसकी वजह से वह कोरोना को हराकर वापस घर लौटीं।

केस-2 : 86 वर्षीय फकरूद्दीन निवासी सिल्वर एस्टेट दिल्ली से गॉल ब्लैडर एवं आंतों की सर्जरी कराकर ग्वालियर लौटे थे। सबसे पहले उनका पुत्र और बाद में वह खुद भी पॉजिटिव पाए गए। परिजन काफी घबरा गए थे। मगर वह हमेशा यही कहते रहे कि चिंता मत करो वह जल्दी ही स्वस्थ होकर घर आएंगे। प्रशासन भी इनके स्वास्थ्य को लेकर काफी चिंतित था, लेकिन वह पूरी तरह ठीक होकर घर लौट गए।

केस-3 : 63 वर्षीय रमेश चंद्र निवासी डबरा को भी शुगर की बीमारी थी। जब कोरोना पॉजिटिव पाए गए तो परिजनों को चिंता थी कि कहीं उनको कुछ हो ना जाए। जबकि रमेश का मानना था कि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अच्छी है। इसलिए कोरोना का संक्रमण उनको नुकसान नहीं पहुंचा सकता। नियमित व्यायाम भी उनके काम आया और वह कोरोना पर जीत हासिल करने में कामयाब हुए।

केस-4 : 70 वर्षीय राधेश्याम गुप्ता डबरा को शुगर,बीपी की बीमारी थी। उनका तीन बार घुटने, पैर व कुल्हे का ऑपरेशन हो चुका है। जब कोरोना पॉजिटिव निकले तो घर वालों को चिंता हुई। राधेश्याम का कहना है उनकी रिपोर्ट चार बार पॉजिटिव आई तो आश्चर्य हुआ पर हिम्मत नहीं हारी और कोरोना को हरा दिया। वह चलने फिरने में असमर्थ हैं पर दिल में कुछ कर गुजरने का जज्बा रखते हैं।

केस-5 : 70 वर्षीय जरदारसिंह बदनापुरा को पैरालिसिस है और कूल्हे की हड्डी टूटने से वह चल फिर नहीं सकते। रिपोर्ट जब पॉजिटिव आई तो परिवार को चिंता हुई। प्रशासन ने उन्हें घर पर ही रहकर इलाज देने का निर्णय लिया। काढ़ा व दवा से दस दिन में ही कोरोना का संक्रमण चलता बना अब कोरोना मुक्त है।

केस-6 : 75 वर्षीय राजेशदेवी मुरार को बीपी की शिकायत है और उनके तीन ऑपरेशन भी हो चुके हैं। रिपोर्ट जब कोरोना पॉजिटिव आई तो आश्चर्य जताया कि लक्षण कोई हैं नहीं और पॉजिटिव बताया जा रहा है। अस्पताल से दस दिन में ही घर पहुंच गईं। उनका कहना है कि सात्विक भोजन,ध्यान व नियम करने से सब कुछ मुमकिन है।

केस-7 : 94 वर्षीय कैलाश नारायण शास्त्री डबरा को हृदय संबंधी बीमारी है। उनका कहना है कि रिपोर्ट पॉजिटिव आई तो थोड़ी चिंता हुई पर आपकी सोच ही आपकी सकारात्मक सोच ही कठनाई को जीतने में सहायक होती है। वही हुआ कोरोना कब आया कब चला गया पता ही नहीं चला।

Posted By: Prashant Pandey

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