Dengue in Gwalior: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में डेंगू पैर पसार चुका है। ठंड बढ़ने के बाद भी हर दिन दर्जन भर से अधिक मरीज डेंगू के मिल रहे हैं। यह तो वे मरीज है जिनकी जांच जिला या मेडिकल कालेज में हुई। जबिकि इतने ही मरीज निजी पैथालोजी में जांच कराकर इलाज ले रहे हैं जिसकी जानकारी खुद स्वास्थ्य विभाग को नहीं रहती है। क्योंकि अभी दो दिन पहले पूर्व सीएमएचओ के दो बेटों को डेंगू निकला था जिन्होंने निजी पैथालोजी पर जांच कराई थी। इसकी जानकारी इन पैथालोजी से मलेरिया विभाग तक नहीं पहुंचाी तब खुद पूव सीएमएचओ ने इसकी जानकारी देकर लार्वा सर्वे का काम कराया था। जिससे डेंगू को नियंत्रित किया जा सके। जबकि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा मनीष शर्मा ने निजी पैथालोजी संचालकों को निर्देश दिए थे कि जो भी जांच पैथालोजी पर की जा रही है उसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को दी जाए। लेकिन यह जानकारी स्वास्थ्य विभाग तक नहीं पहुंच रही है फिर भी इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा सका। यही हालत निजी अस्पतालों के संचालक व शासकीय अस्पतालों के प्रभारियों का जिन्हें डेंगू वार्ड अलग से बनाने का स्पष्ट निर्देश दिए हैं, कि डेंगू बुखार के सम्भावित रोगी का प्रथम पांच दिन के बुखार की अवधि में डेंगू जांच एन.एस.1 एन्टीजन एलाईजा किट से एलाईजा पद्धति से की जाए। पांच दिवस से अधिक अवधि के बुखार के रोगी की डेंगू रोग की जांच एन्टीबॉडी बेस्ट किट एलाईजा पद्धति द्वारा की जाए। साथ ही संक्रमित निकलने पर सीएमएचओ कार्यालय को तत्काल जानकारी उपलब्ध कराई जाए। लेकिन सीएमएचओ कार्यालय में शहर की कई निजी पैथोलॉजी जहां कार्ड टेस्ट तो कर ही नहीं हैं। साथ ही मरीजों की जानकारी भी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। सीएमएचओ द्वारा डेढ़ माह पूर्व सभी निजी अस्पतालों को निर्देश जारी करते हुए अस्पतालों में उपलब्ध पलंगों के दस प्रतिशत पलंग डेंगू मरीजों को भर्ती करने के लिए आरक्षित किए जाएं। लेकिन सीएमएचओ के निर्देश का निजी अस्पतालों में तो दूर शासकीय अस्पतालों में ही पालन नहीं किया गया है। शासकीय अस्पतालों में अगर डेंगू का कोई मरीज पहुंचता भी है तो उसे सामान्य मरीजों के साथ ही भर्ती कर दिया जाता है। जिससे अन्य मरीजों को भी डेंगू होने का खतरा बना हुआ है।

Posted By: anil tomar

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