ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। मच्छर जनित बीमारियाें का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है। डेंगू मलेरिया के साथ अब जीका वायरस का खतरा मडरा रहा है। जीका वायरस के शुरूआती लक्षण हल्के होते हैं। बुखार, रेशेज, जोड़ों में दर्द, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और उल्टी जैसे लक्षण शामिल हैं, जीका वायरस होने की वजह से अस्पताल में भी भर्ती होना पड़ सकता है। गर्भवती महिलाएं जीका वायरस की चपेट में सबसे ज्यादा आती हैं।

जीका वायरस गर्भवती महिला से उसके भ्रूण में जा सकता है, जिससे अजन्मे बच्चे में मास्तिष्क दोष पैदा हो सकता है, जिसे माइक्रोसेफेली के रूप में जाना जाता है. इसमें नवजात शिशु का मास्तिष्क और सिर सामान्य से आकार में छोटा हो सकता है। हालंकि लक्षणों का अनुभव करने वाली गर्भवती महिलाओं को ब्लड या यूरीन टेस्ट के लिए डाक्टर को दिखाना चाहिए ताकि इस तरह की स्थिति से बचा सके। सबसे ज्यादा रिस्क ऐसी जगहों पर जाना है, जहां जीका मौजूद है। मुख्य रूप से यह मच्छरों के काटने से फैलता है, लेकिन कभी-कभी एक गर्भवती महिला से उसके भ्रूण तक, यौन संपर्क के जरिए और ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए भी यह फैल सकता है। फिलहाल जीका का कोई इलाज नहीं है। लेकिन इसके लक्षण दिखने वाले व्यक्ति को आराम और डिहाइड्रेशन को रोकने के लिए पेय पदार्थ पीने की सलाह दी जाती है।जीका संक्रमण को रोकने का सबसे अच्छा तरीका है- मच्छरों के काटने से बचना, मच्छरों को बढ़ने से रोकना, सुरक्षित यौन संबंध बनाना। फुल स्लीव्स के कपड़े पहनना, कीट निवारक का इस्तेमाल करना, बिस्तर में मच्छरदानी लगाना आदि। इन सब तरीकों से मलेरिया, डेंगू व जीका वायरस से बचा जा सकता है। यह सावधानी भी रखें कूलर और गमले में पानी को समय-समय पर बदलते रहें,सब्जियां, पीने का पानी और फलों को साफ रखें,घर में मच्छर भगाने वाली दवा का इस्तेमाल करें,बच्चों को मच्छरदानी में सुलाएं तो बेहतर रहेगा,पैर और हाथ को गंदा न रखें, गंदा होने पर साबुन से धोएं।

Posted By: anil tomar

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