15 दिवसीय अखंड पाठ में शामिल हो रहे सैकड़ों श्रद्धालु

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी ससंघ के सानिध्य में चम्पाबाग धर्मशाला में चल रहे 15 दिवसीय महामंत्र णमोकार के अखंड पाठ की अविरल धारा में श्रद्धालु 24 घण्टे डुबकी लगा रहे हैं। इसमें जैन समाज की संस्थाएं क्रमशः भागीदारी कर रही हैं। ढोलक और झांझर की थाप पर लय और ताल के साथ ये पाठ किया जा रहा है।

जैन समाज के प्रवक्ता ललित जैन ने बताया कि रविवार को अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन महिला परिषद की अध्यक्ष दीपिका जैन और श्री दिगंबर जैन जागरण युवा मंच ग्रेटर ग्वालियर, सिकंदर कंपू के अध्यक्ष महेंद्र जैन बंटी के नेतृत्व में इन संस्थाओं के सदस्यों ने णमोकार महामंत्र का लगातार 24 घंटे पाठ किया। इन सदस्यों ने सुबह 5 बजे चम्पाबाग धर्मशाला पहुंचकर गणिनी आर्यिकाश्री विशुद्धमती माताजी के पाद प्रच्छालन कर आरती उतारी और अर्घ्य समर्पित कर आशीर्वाद लेकर पाठ शुरू किया। इस मौके पर माधवी शाह,महिला परिषद की अध्यक्ष दीपिका जैन, सचिव अर्चना जैन, कोषाध्यक्ष रेखा सोगानी, अंगूरी जैन, मिट्ठू सेठी, मधु बड़जात्या, रेखा पाटोदी, अल्पना जैन सहित बड़ी संख्या में दोनों संस्थाओं के सदस्य पाठ में शामिल हुए।

मन में वैराग्य का भाव आने पर रिश्ते-नाते गौण हो जाते हैं:माताजी

इस अवसर पर धर्मचर्चा करते हुए विद्या वाचस्पति, पट्ट गणिनी आर्यिकाश्री विज्ञमती माताजी ने कहा कि जीवन में वैराग्य का भाव किसी के भी मन में कभी भी आ सकता है। जब मन में वैराग्य भाव आता है तो रिश्ते-नाते भी गौण हो जाते हैं। वैराग्य के पथ पर आगे बढ़ने वाले को मोक्ष की प्राप्ति के लिए कठोर तपस्या करना पड़ती है। पार्श्वनाथ स्वामी ने भी वैराग्य धारण कर राजपाट त्याग कर कठिन तप कर मोक्ष की प्राप्ति की थी। माताजी ने कहा कि मोक्ष का मार्ग आसान नहीं होता, इसके लिए कठोर तपस्या और साधना करना पड़ती है। ऐसा कठिन तप करने वाले ही मोक्ष प्राप्त कर पाते हैं। माताजी ने बताया कि इंसान कितना भी पुरुषार्थ कर ले, लेकिन उसे समय और भाग्य से पहले कुछ नहीं मिलता। कोई भी व्यक्ति कितना भी बड़ा क्यों न हो या खुद को बड़ा समझने की गलतफहमी पाले हो, तीर्थंकर से बड़ा कोई नहीं होता। जब अहंकार आड़े आ जाता है तो बलशाली भी नष्ट हो जाता है।माताजी ने कहा कि भले ही पाप अंधेरे में या छिपकर किया जाता हो, लेकिन जब उजागर होता है तो दुनिया देखती है। इसी तरह किसी को पता नहीं होता कि महाराज कब किंकर बन जाएगा और किंकर कब तीर्थंकर बन जाएगा। इसलिए ये कभी न सोचें कि मैं सब कुछ हूं, तुम कुछ नहीं। अपने कर्मों का फल तो भोगना ही पड़ता है। आज इंसान धन के पीछे भाग रहा है, क्योकि तुम्हें लगता है धन से सुख मिलेगा, अरे भैया, जिसे तुम सुख मान रहे हो वह तो सुख का आभास है।

Posted By: anil tomar

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