ग्वालियर. (नईदुनिया प्रतिनिधि)। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग (उपभोक्ता फोरम) ने कोविड-19 पीड़ित का बीमा कंपनी द्वारा क्लेम खारिज करने के मामले में कहा है कि हर मरीज के लिए डाक्टर की सलाह सर्पोपरि होती है, न कि गाइड लाइंस। यदि मरीज अपनी स्वयं की मर्जी या गाइड लाइंस के अनुसार करे, तब उसकी ज्यादा स्थिति खराब हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसे उत्तरदायी ठहराया जाएगा। हर मरीज की इम्युनिटी अलग-अलग होती है। ऐसी स्थिति में यह कहते हुए क्लेम खारिज नहीं किया जा सकता है कि वह घर पर रहकर इलाज ले सकते थे। अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं है। बीमा कंपनी ने परिवादी को मानसिक व शारीरिक पीड़ा दी है। इसके लिए पांच हजार रुपये क्षतिपूर्ति के रूप में जाएं। तीन हजार रुपये केस लड़ने के खर्च के दिए जाएं। साथ ही बीमा क्लेम पर पुन: विचार कर ब्याज के साथ पैसा लौटाया जाए।

कैलाश विहार निवासी कृष्ण कुमार शर्मा को 24 अप्रैल 2021 को बुखार खांसी की शिकायत हुई। डाक्टर से इलाज लेने के बाद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुअा तो कोविड-19 का टेस्ट कराया। वे कोविड-19 से संक्रमित निकले। इसके बाद सीटी स्कैन कराया तो संक्रमण बढ़ गया था। डाक्टर ने उन्हें अस्पताल में भर्ती होने की सलाह दी। ग्वालियर में भर्ती नहीं हो सके तो एंबूलेंस के माध्यम से कृष्ण कुमार शर्मा व उनकी पत्नी एंबूलेंस के माध्यम से जलंधर पहुंचे। यहां पर उनकी बेटी व दामाद रहते थे। कृष्ण कुमार शर्मा को जलंधन के सीक्रेट हार्ट हास्पीटल में भर्ती कराया। 30 अप्रैल से सात मई 2021 तक अस्पताल में भर्ती हुए। उनके इलाज में एक लाख 45 हजार रुपये खर्च हुए। अपने इलाज की सूचना स्टार हेल्थ एंड एलाईड कंपनी को दे दी थी। जब उन्होंने इलाज के पैसे मांगे तो बीमा कंपनी ने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया। तर्क दिया कि एम्स की गाइड लाइंस के अनुसार अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं थी। घर पर रहकर भी इलाज ले सकते थे। उन्होंने 16 नवंबर 2021 को उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया। फोरम के नोटिस के बाद बीमा कंपनी ने जवाब दिया।

परिवादी में थे हल्के लक्षण

- स्टार हेल्थ एंड एलाईड कंपनी ने फोरम में जवाब दिया कि परिवादी में कोविड के हल्के लक्षण थे। उनके शरीर का तापमान 98.5 डिग्री फारेनहाईट था। एसपी02 लेवल 96 था। इनमें कोविड के हल्के लक्षण थे। एम्स की गाइड लाइन के अनुसार एेसे मरीज घर पर इलाज लेकर ठीक हो सकते थे। उनका क्लेम खारिज करके के कोई गलती नहीं की है और न गलत व्यापार किया है।

- परिवादी ने इसका खंडन किया कि उनका अाक्सीजन लेवल लगातार गिर रहा था। इस वजह से अस्पताल में भर्ती हुए थे।

- फोरम ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद अादेश दिया कि बीमा कंपनी 45 दिन में बीमा क्लेम पर फिर से बिचार करे। बीमा क्लेम स्वीकार किया जाता है तो सात फीसद ब्याज के साथ पैसा देना होगा। क्षतिपूर्ति के रूप में पांच हजार रुपये देने होंगे।

Posted By: anil tomar

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