ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। ह्दय की धमनियों का ब्लाकेज खोलने के लिए ड्रिल चलाई जाए यह शायद आपने कभी नहीं सुना होगा। लेकिन यह हकीकत है जो ग्वालियर के आरजेएन अपोलो हास्पिटल में हुई है। जहां पर एक युवक के धमनियाें में केल्शियम का ब्लाकेज था जिसे खोलने के लिए डाक्टर को उसके ह्दय के अंदर बारीक ड्रिल मशीन चलानी पड़ी और स्टंट डाला गया।

यह ड्रिल मशीन के लिए तार पैर की नस से ह्दय तक पहुंचाया गया। हालांकि इस पद्दति को रोटाब्लेशन तकनीक कहा जाता है। जिसका प्रयोग पहली बार ग्वालियर में हुआ है। क्योंकि यह तकनीक बड़े शहरों में ही है। इस तकनीक का उपयोग करने में भारी खर्चा आता है इसलिए हर कोई इसका उपयोग नहीं कर पाता। 82 वर्षीय बुजुर्ग की नसों के ब्लाकेज को बिना सर्जरी किए ही खोल दिया गया। जिससे सीने में खून का संचार ठीक से होने लगा और दर्द से राहत मिल गई। रतन ज्योति डालमिया हार्ट इंस्टीट्यूट में एक बुजुर्ग सीने में दर्द की शिकायत काे लेकर भर्ती हुआ था। जांच में पता चला कि बुजुर्ग की धमनियां में ब्लाकेज है। यह ब्लाकेज कैल्शियम के कारण था। इसलिए खून का संचार ठीक से न होने के कारण सीने में दर्द बढ़ गया था। लेकिन इस उम्र में सर्जरी करना खतरे से खाली नहीं था। इसलिए ह्दयरोग विशेषज्ञ डा अभिषेक शर्मा ने परामर्श देते हुए कहा कि रोटाब्लेशन तकनीक से धमनियों के ब्लाकेज को खोला जा सकता है। मरीज के अटेेंडेंट की सहमति मिलने पर डा अभिषेक शर्मा ने बुजुर्ग की एंज्यिोप्लास्टी रोटाब्लेशन तकनीक के आधार पर की। इस पद्धति में 1.5 एवं 1.7 मिलीमीटर की ड्रिल हृदय की धमनियों के अंदर चलाई गई। जिससे कैल्शियम बहुत ही बारीक टुकड़ों में टूट कर निकल गया। उसके बाद छल्ला लगाने की जगह बनाई जाती है और उसके पश्चात छल्ला लगाया गया। इस आपरेशन में करीब 30 मिनट का वक्त लगा। मरीज दूसरे दिन ही चलने फिरने की स्थिति में आ गया और उसे डिस्चार्ज कर घर पहुंचा दिया गया है।

Posted By: anil tomar

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