ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कार्तिक शुक्ल पक्ष के दौरान आठवें दिन रविवार को श्रद्धाभाव से गोपाष्टमी का त्योहार मनाया गया। गोपाष्टमी के अवसर पर मुरार स्थित लालटिपारा गोशाला एवं गोले का मंदिर गोशाला में गायों की पूजा की गई। साथ ही शहर के कई लोग गोशालाओं में पहुंचे और गोवंश को हरा चारा व गुड़ खिलाया।

गौरतलब है कि गोपाष्टमी गायों की पूजा और प्रार्थना करने के लिए समर्पित पर्व है। इस दिन लोग गाय (गोधन) के प्रति अपनी कृतज्ञता और सम्मान दर्शाने के लिए विशेष पूजन करते हैं। मान्यता के अनुसार गोपाष्टमी की पूर्व संध्या पर गाय का पूजन करने वाले श्रद्धालुओं को खुशहाल जीवन, अच्छा भाग्य और समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है। ज्योतिषाचार्य सतीश सोनी के मुताबिक कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को परंपरागत ढंग से गोपाष्टमी मनाने से विशेष पुण्यलाभ मिलता है। इस दिन गाय, गुरु और गोविंद की पूजा करने से घर में सुख समृद्घि के साथ धन की वृद्धि होती है। गोपाष्टमी पर गुरु, गोविंद और गाय की पूजा के साथ गो रक्षक ग्वाला को भी तिलक लगाकर मीठा खिलाने की परंपरा है। वहीं जो बहनें भाई दूज के पर्व पर अपने भाइयों को तिलक नहीं कर पाईं, वह इस दिन अपने भाइयों को तिलक कर सकती हैं।

यह है पौराणिक मान्यता

गोपाष्टमी पर्व गोवर्धन पर्वत से जुड़ा है। भगवान श्री कृष्ण ने गोचर लीला इसी दिन से आरंभ की थी। भगवान श्री कृष्ण ने जब माता से गो सेवा करने की इच्छा व्यक्त की तो माता यशोदा ने उन्हें अनुमति नहीं दी। बाल हठ के कारण कन्हैया जी ने शांडिल ऋषि से इसका मुहूर्त निकलवाया और यह मुहूर्त था कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी। तभी से गोपाष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा। यूं तो हिंदू परिवारों में हर रोज गाय को पहली रोटी खिलाने की परंपरा है, परंतु गोपाष्टमी पर गो पूजन का विशेष महत्व है।

Posted By: Nai Dunia News Network

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