ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। एक दशक पहले तक पान को आमजन बहुत ही चाव से खाते थे, इसके खाने से कई प्रकार के खनिज तत्व भी मिलते थे और यह पाचनतंत्र के लिए भी काफी फायदेमंद था। लेकिन ग्वालियर में पान की खेती कम होने एवं पान महंगा होने के कारण लोगों ने इसे खाना कम कर दिया है। इसके कारण 60 प्रतिशत पान के ग्राहक कम हो गए हैं। जबकि इसकी जगह सुपाड़ी और गुटखे ने ले ली है जो कि मुंह के कैंसर का कारण बन रहा है।

गुटखे का उपयोग अधिक होने से सुपाड़ी और कत्थे की मांग बढ़ी है। इसके कारण यह दोनाें ही महंगे हो गए। 350-400 रुपए किलो बिकने वाली सुपाड़ी 600-900 रुपए तो कत्था भी 800 से 2000 रुपए किलो तक पहुँच गया। ईलाइची व लोंग भी महंगे होने के कारण पान भी आज 20 से 25 रुपए तक पहुंच गया जिसे लोगों ने खाना अब कम कर दिया। इसके कारण शहर से पान की 50 फीसदी दुकानें गायब हो गई हैं। इनकी जगह गुटखा और सिगरेट के छोटे-छोटे स्टालों ने ले ली है। जबकि शहर में बिलौआ, बरई , संदलरपुर क्षेत्र से देशी पान का पत्ता, होता था जो कि कई देशों में सप्लाई किया जाता था। लेकिन इस पान की मिठास भी अब महंगाई और खेती में लगने वाली कड़ी मेहनत के कारण कम हो चुकी है। इसके साथ ही पान की खेती में बीमारी भी बहुत जल्द फैलती है इसके कारण लोगों ने खेती करना कम कर दिया है। पान खाना खाने के बाद ही खाया जाता है जिससे भोजन को पचाने में मदद मिलती है। साथ ही चूने से कैलशियम मिलता है।

इसलिए भी कम हुआ पान खाना

पहले पान 2 रुपए से 10 रुपए तक में मिल जाता था। लेकिन अब पान की कीमत 15 से लेकर 50 रुपए तक में मिलता है। जबकि गुटखा 20 रुपए में मिल जाता है। पान को खाने में एक बार में ही 20 रुपए ख्रर्च हो जाते हैं। जबकि गुटखा पाउच में आता है और उसका उपयोग कई बार कर सकते हैं।

Posted By: anil tomar

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