ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। नगरीय निकाय चुनाव प्रचार के साथ ही बाजारों में रौनक लौटने लगी है। प्रत्याशी प्रत्यक्ष व ई-प्रचार पर जमकर पैसा खर्च करेंगे, लेकिन इस बार ई-प्रचार करना महंगा हो गया है। पिछले कुछ दिनों में इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म मुख्यत: फेसबुक ने पेज पर लाइक्स बटोरने की राशि छह गुना तक बढ़ा दी है। पहले जहां 50 पैसे में पेज पर एक लाइक आता था, वह कीमत अब तीन रुपए हो गई है। इसी प्रकार पोस्ट पर पैसा लगाकर उसे बूस्ट करना भी 30 रुपए महंगा हो गया है। पिछले चुनाव तक यह राशि न्यूनतम 50 रुपए व 18 प्रतिशत जीएसटी थी, जो अब बढ़ाकर 80 रुपए व 18 प्रतिशत जीएसटी कर दी गई है।

ई-प्रचार के लिए ज्यादातर प्रत्याशी फेसबुक पर ही निर्भर हैं, क्योंकि इस इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्म पर उपयोगकर्ता को लाइक्स, शेयर और बूस्ट करने के लिए क्षेत्र, आयु वर्ग सहित अधिकतम पहुंच के विकल्प मिलते हैं। इसके अलावा आसान प्लेटफार्म होने के कारण इसके यूजर्स भी बड़ी संख्या में हैं। सभी राजनेता आजकल वर्चुअल प्रचार के लिए फेसबुक का उपयोग करते हैं। अब महापौर और पार्षद पद के दावेदारों ने अपने-अपने फेसबुक पेज तैयार करना शुरू कर दिया है। ये प्रत्याशी ई-प्रचार में पैसा खर्च करेंगे, ताकि उनकी चुनावी गतिविधियों व जनसंपर्क की जानकारी अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचे लेकिन उन्हें अब यह प्रचार पिछले चुनाव के मुकाबले महंगा पड़ेगा। गत विधानसभा उपचुनाव 2020 में ई-प्रचार के लिए फेसबुक पर न्यूनतम बूस्ट की राशि जीएसटी सहित 59 रुपए थी, जो अब बढ़कर 95 रुपए हो गई है। इसी प्रकार पेज पर 100 लाइक्स इकट्ठे करने के लिए लोगों को 50 रुपए के बजाय 300 रुपए खर्च करने पड़ रहे हैं।

-क्या और कैसे सुविधा देता है-

इंटरनेट मीडिया पर पेज बनाने के बाद कोई जानकारी पोस्ट करने पर बूस्ट का विकल्प दिया जाता है। इस बूस्ट में फेसबुक खुद ही विकल्प देता है कि कितने रुपए का भुगतान करने पर वह पोस्ट कितने हजार उपभोक्ताओं तक पहुंचेगी। इसमें डेबिट-क्रेडिट कार्ड से भुगतान के अलावा यह भी विकल्प होता है कि किस आयु वर्ग के लोगों के बीच पोस्ट पहुंचनी चाहिए और किस इलाके के उपभोक्ताओं के मोबाइल पर यह प्राथमिकता से दिखनी चाहिए। यदि उपभोक्ता ने पेज को लाइक कर रखा है, तो उसे प्राथमिकता से वह पोस्ट दिखेगी। पेज लाइक न करने वाले उपभोक्ताओं को वह पोस्ट स्पांसर्ड के विकल्प के तौर पर बार-बार नजर आती है।

-एसएमएस भेजना भी हुआ महंगा-

प्रचार के दौरान इंटरनेट मीडिया के अलावा उपभोक्ताओं को एसएमएस भी भेजे जाते हैं। इसके लिए डोमेन खरीदना आवश्यक होता है। इसके बाद एक क्लिक पर सैकड़ों मोबाइलों पर मैसेज भेजे जा सकते हैं। पिछले चुनाव तक 15 से 18 पैसे में एक मैसेज भेजा जाता था, जो इस बार बढ़कर 30 पैसे प्रति मैसेज हो चुका है। ऐसे में यह सामान्य सी सुविधा भी उम्मीदवारों को महंगी पड़ रही है।

वर्जन

100 रुपए न्यूनतम खर्च हो रहे हैं

वर्तमान में एक बूस्ट में न्यूनतम 80 रुपए व 18 प्रतिशत जीएसटी के चलते एक पोस्ट पर 100 रुपए तक खर्च हो रहे हैं। पिछले चुनाव में यह राशि 60 रुपए पड़ रही है। ई-प्रचार भी अब महंगा हो रहा है।

सुशील भदौरिया, प्रबंधक इलेक्शन एंड स्ट्रेटजिकल पीआर

महंगा हुआ है प्रचार

पिछले उपचुनाव के मुकाबले इस बार ई-प्रचार महंगा हो गया है। लाइक्स के लिए छह गुना ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं। वहीं बूस्ट की राशि में भी बढ़ोतरी हुई है। एसएमएस भेजना भी महंगा हो गया है।

दानिश खान, संचालक डिप्टी मीडिया वर्क्स

Posted By: anil tomar

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