- केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया तेलाभिषेक,

- एक किमी ज्यादा दूर तक लगी रही श्रद्धालुओं की कतार

ग्वालियर.मुरैना। के नूराबाद क्षेत्र के ऐंती पर्वत स्थित शनिदेव मंदिर पर शनिश्वरी अमावस्या को विशाल मेला लगा। शुक्रवार सूर्यास्त के बाद मंदिर पर दर्शनार्थियों की कतार लगी, जो शनिवार सूरज ढलने के बाद तक जारी रही। शनिदेव के दर्शनाें के लिए देशभर से तीन लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे। शनि अमावस्या पर भगवान शनि का पहला तेलाभिषेक केंद्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया। श्री तोमर सूर्याेदय से पहले रात में ही शनिधाम पहुंच गए और पूजा-अर्चना करते हुए भगवान शनि को काले रंग की पोशाक चढ़ाई और इमरती का भोग लगाया।

गौरतलब है कि हर शनि अमावस्या को ऐंती पर्वत स्थित शनि मंदिर पर मेला लगता है, लेकिन बीती 10 जुलाई को कोराना की दूसरी लहर के प्रकोप के कारण शनि मेले का आयोजन नहीं हुआ था। इस बाद भले की कोरोन के नए वेरिएंट ओमेक्रोश की दहशत बढ़ रही है, पर शनि मेले पर प्रशासन ने इस बार कोई पाबंदी नहीं रखी। इसी का असर रहा, कि मेेले में ग्वालियर-चंबल ही नहीं, बल्कि दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान, उत्तर प्रदेश के अलावा कई प्रांतों से लोग दर्शनों के लिए आए। शुक्रवार-शनिवार रात से ही मंदिर के पट श्रद्धलुओं के लिए खोल दिए गए। विशेष पूजा-पाठ करने वाले श्रद्धालुओं ने रात में ही हवन-पूजन किया। दर्शनार्थियों ने भगवान शनि के प्रकोप से बचने की कामना लेकर उन्हें प्रसन्ना करने के लिए सरसों के तेल से अभिषेक किया, काले रंग की पोशाक चढ़ाई और तिल, लड्डुआें की भेंट चढ़ाई। कई लोग मुण्डन कराकर बालों का त्याग करते तो कई पुराने कपड़ों व जूते-चप्पलों का त्याग करके नई पोशाक में भगवान के दर्शनों को पहुंचे। मंदिर परिसर में पुराने पकड़े व जूते चप्पलों के जगह-जगह ढेर हो गए, जिन्हें नगर निगम के ट्रकों में भरकर टंचिंग ग्राउण्ड पर फिकवाया जा रहा था। सुरक्षा व्यवस्था के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल तैनात था। पूर्व संभाग आयुक्त एमके अग्रवाल, कलेक्टर बी कार्तिकेयन, एसपी ललित शाक्यवार शुक्रवार से ही मेले में डेरा जमाए हुए थे।

हनुमानजी ने लंका से फेंका, यहां गिरे थे शनिदेव : पुजारी

यह मंदिर दुनिया का सबसे प्राचीन शनि मंदिर है। शनि मंदिर के पुजारी बृजभूषण दास बताते हैं, कि यह मूर्ति त्रेतायुग की है, ऐंती पर्वत का सही नाम विंध्याचल पहाड़ हैं, लेकिन ऐंती ग्राम पंचायत होने के कारण पूरी जगह का नाम एंेती चलन में आ गया है। पुजारी बृजभूषण दास त्रेतायुग के शनि मंदिर के पीछे की प्राचीन कथा बताते हुए कहते हैं, कि जब हनुमानजी लंका दहन कर रहे थे तब उन्हें लंका में रावण के यहां भगवान शनि बंधक मिले। हनुमानजी ने शनि भगवान को रावण के बंधनों से मुक्त कराया और अपने पूरे बल के साथ भारत की धरा की ओर फेंका, तो शनि भगवान मुरैना के पास घनघोर जंगल क बीच इसी पहाड़ी पर गिरे थे। यहीं शनि भगवान ने घोर आराधना कर अपनी शक्तियों को वापस पाया। जहां शनि भगवान गिरे थे और तपस्सा की थी वहीं उनका मंदिर बना है। इस मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा राजा विक्रमादित्य ने की थी, तब यह दुनिया की नजरों में आया।

चलने में असमर्थ, बेटों के सहारे आए दर्शनाें को

कई बीमार लोग भी शनि भगवान के दर्शनों को पहुंचे। उत्तर प्रदेश के महूरानीपुर निवासी 65 वर्षीय गोविंद राय को लकवा मार गया और वह चलना तो दूर अपने पैरों पर खड़े भी नहीं हो पा रहे थे, लेकिन अपने दो बेटे विजय व जितेन्द्र के सहारे वह शनि भगवान के दर्शनों को पहुंचे। हरियाणा के सिरसा निवासी विनोद मेहता ने बताया कि वह 25 साल से यहां आ रहे हैं। मैनपुर निवासी अशोक कुमार गुप्ता ने बताया कि 30 साल पहले जब यहां छोटा मंदिर था तब से आ रहे हैं। इनका कहना है कि भगवान शनि की कृपा से उनका व्यापार लगातार बढ़ा है और घर में किसी को बीमारी ने नहीं घेरा।

नहीं चली स्पेशल ट्रेन, दिखा कोरोना का भी डर

मेला समिति से जुड़े सदस्यों का दावा है, कि शनि अमावस्या के एक दिनी मेले मंे आने वाले श्रद्धालुआंे की संख्या 6 से 7 लाख तक दर्ज हुई है, लेकिन कोरोना महामारी के कारण दो साल से शनि मेले में भीड़ कम हो रही है। एक साल तो मेले का आयोजन हुआ ही नहीं था। इसके बाद इसी साल 13 मार्च को लगे शनिमेले में लाखों श्रद्धालु आए। इसके बाद 10 जुलाई को पड़ी शनि अमावस्या के मेले पर प्रशासन ने रोक लगा दी। हर शनि अमावस्या पर स्पेशल ट्रेनें भी चलती थीं, जो दो साल से बंद है और इस शनि अमावस्या को भी यह स्पेशल ट्रेन नहीं आई। दूर-दूर से श्रद्धालु अपने वाहनों से पहुंचे। अगर स्पेशल ट्रेन चलती तो यात्रियोें की संख्या और बढ़ जाती।

मेले में यह भी हुआ

- मेले में सुरक्षा व्यवस्था के लिए जिलेभर के थाना प्रभारी, एसएएफ व वन विभाग के कर्मचारियों के साथ पहली बार स्काउड गाइड के छात्र-छात्राओं के अलावा शिक्षण संस्थाआें के युवा भी तैनात किए गए।

- मेले में हजारों लोगों ने मुण्डन करवाया। कोरोना और एड्स बीमारी का खतरा देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने मुण्डन करने वाले लोगों को 1000 ब्लेड नि:शुल्क बांटे।

- श्रद्धालुओं को भोजन, नाश्ता, चाय, पानी आदि के लिए ऐेंती पर्वत तक जाने वाले हर मार्ग पर जगह-जगह भण्डारे लगे। यहां राहगीरों को रोक-रोककर उन्हें चाय-पानी से लेकर खाने-पीने की सामग्री दी, भोजन करवाया।

- मेले की भीड़ में जिनकी तबियत खराब हुई उन्हें इलाज देने के लिए चार अस्थायी अस्पताल बनाए गए। चेकअप सेंटरांे पर लोगों को कोरोना वैक्सीन का दूसरा डोज भी लगवाने की सुविधा रखी गई।

- नूराबाद के अंडर ब्रिज को निकलते ही शनि मंदिर तक जाने वाली सड़क को दो दिन के भीतर ही बनवाया गया, जिससे श्रद्धालुओं को आवागमन में सुविधा हो।

- मंदिर में यात्रियों की सुरक्षा से लेकर उन्हें दर्शनों में सुलभता रहे इसके लिए पूरी व्यवस्थाएं की हैं। हर विभाग के अफसरों को जिम्मेदारी दी गई। मंदिर में दर्शनों के उप्र, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, पंजाब तक के लोग आए हैं। केंद्रीय मंत्री भी यहां पूजा-अर्चना के लिए आए। भगवान शनिदेव न्याय के देवता हैं, हर व्यक्ति यहां न्याय मांगने आता है।

संजीव जैन, एसडीएम, मुरैना

- भगवान शनिदेव संकट हरने वाले हैं। यहां लोग अपनी पीड़ा व दुखों के निदान के लिए आते हैं। भगवान शनि सभी की मनोकामना पूरी करते हैं। मेरे एक दोस्त चुनाव जीतने की मनोकामना लेकर यहां आए और चुनाव जीत गए। हमारे यहां के कईयों बीमार भगवान शनि के दर्शनों से स्वस्थ हो गए। हम भी भगवान शनि के दर्शनों के लिए परिवार के साथ आए हैं।

किशन व्यास, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश

केंद्रीय मंत्री ताेमर पहुंचे शनिदेव की शरण मेंः केंद्रीय मंत्री एवं मुरैना सांसद नरेंद्र सिंह ताेमर भी आज सुबह ऐंती गांव स्थित शनि मंदिर में शनिदेव के दर्शनाें के लिए पहुंचे। यहां पर उन्हाेंने हनुमान जी एवं शनिदेव का विधि विधान से पूजन किया। इस दाैरान उन्हाेंने मंदिर की व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। खास बात यह है कि कुछ समय पहले केंद्रीय मंत्री ज्याेतिरादित्य सिंधिया भी शनि मंदिर में दर्शन करने पहुंचे थे। इसके बाद अब केंद्रीय मंत्री ताेमर ने शनिचरी अमावस्या पर शनि मंदिर पहुंचकर शनिदेव का पूजन किया है।

Posted By: vikash.pandey

NaiDunia Local
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