अंतिम दिन लोगों ने घरों में किया तर्पण, दांव को सरोबरों में विसर्जित किया, दान-पूण्य किया, मंदिरों पर भोजन वितरित किया

ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। सोलह दिन के श्राद्ध पक्ष का समापन आज सर्व पितृ अमावस्या को अंतिम तर्पण करने के साथ हो गया। लक्ष्मीबाई कालोनी स्थित कम्युनिटी हाल में सुबह सात बजे ज्योतिषाचार्य डा अनिल कुमार वाजपेयी की मौजूदगी में वैदिक मंत्रोच्चरण व विधि-विधान के साथ सामूहिक तर्पण कर पितरों को सुख-समृद्धि के आशीष की कमाना के साथ पितरों को पित लोक के लिये विदा किया। माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में वायु के रूप में पितृ पृथ्वी लोक पर अपने स्वजनों से तर्पण, पिंडदान व श्राद्ध की अभिलाषा के साथ आते हैं। और स्वजनों को सुख-समृद्धि व एश्वर्य का आशीर्वाद देकर जाते हैं। महाराष्ट्र ब्राह्मण समाज ने सामूहिक तर्पण विवेकानंद मार्ग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई स्कूल में किया।

लक्ष्मीबाई कालोनी कम्युनिटी में हुआ सामूहिक तर्पण

लक्ष्मीबाई कालोनी में स्थित कम्युनिटी हाल में पिछले 22 वर्षों से अनवरत रूप से ज्योतिचार्य डा अनिल वाजपेयी द्वारा सामूहिक तर्पण का आयोजन किया जाता है। रविवार को पांच सौ से अधिक लोगों ने आचार्यों द्वारा किये गये वैदिक मंत्रोच्चरण के साथ तर्पण कराया। तर्पण के उपयोग में आने वाले सभी सामग्री की व्यवस्था आयोजकों ने की थी। तर्पण करने वाले व्यक्ति को केवल एक परात, लौटा व अगोछा लेकर आना था।

महारानी लक्ष्मी बाई विद्यालय में भी हुआ सामूहिक तर्पण

महाराष्ट्र ब्राह्मण सभा द्वारा सामूहिक पितृ तर्पण कार्यक्रम रविवार को महारानी लक्ष्मीबाई उच्चतर माध्यमिक विद्यालय विवेकानंद मार्ग पर किया गया। कार्यक्रम मे निवेदन प्रमोद गजेंद्र गडकर ने किया। प्रवक्ता निशिकांत सुरंगें ने बताया कि गुरु जी रवि गोसावी के मार्गदर्शन में 57 यजमानों ने विधी विधान से पितृ तर्पण किया कार्यक्रम व्यवस्था मे हेमंत खेडकर दत्ता भालेराव आशुतोष पुनीत जोशी पाचपोरे सोमनी कालेकर थे। इस अवसर पर वैद्य गजेंद्र गडकर डॉ सप्रे अभय पापरिकर चान्दोरकर कुंभराजवाले आदि उपस्थिय थे।

घरों पर तर्पण कर दांव विसर्जित की

सर्व पितृ अमावस्या के दिन अंतिम दिन लोगों ने घरों में भी तर्पण किया। और दांव को कटोराताल, लक्ष्मण तलैया व सागरताल में विसर्जित किया। नगर निगम द्वारा सरोबरों पर तर्पण की विशेष व्यवस्था की गई थी। घरों में खीर-पलपुआ सहित अन्य पकवान बनाकर पितरों का भोग लगाया, गो, कांग व कुत्ते का ग्रास निकालकर विदाई दी। अंतिम दिन ब्राह्रण भोज भी कराया।

मंदिरों में दान-पूण्य किया

श्रद्धालुयोें ने पितरों की शांति के लिए मंदिरों के बाहर बैठे जरूरतमंदों को भोजन कराया। और सामर्थ्य के अनुसार दान-पुण्य किया। मंदिरों में ब्राह्मणों को खाने का कच्चा सामान के साथ दक्षिणा देकर आशीर्वाद लिया। इसके अलावा वस्त्र व अन्य सामान भी दान किया।

Posted By: anil tomar

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