ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। जिला एवं सत्र न्यायालय से डेयरी कारोबारी को बड़ी राहत मिल गई। खाद्य विभाग ने डेयरी कारोबारी पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे कोर्ट ने घटाकर 35 हजार रुपये कर दिया। कोर्ट ने कहा कि विभाग ने जुर्माना लगाते वक्त तथ्यों को ध्यान में नहीं रखा। 35 हजार जुर्माना न्याय संगत है। इसलिए आदेस में हस्तक्षेप किया जाता है।

खाद्य सुरक्षा अधिकारी निरूपमा शर्मा [26. सितंबर 2018 को सुबह 11.30 बजे लाला का बाजार, लश्कर, ग्वालियर स्थित फर्म न्यू गोपाल डेयरी पर निरीक्षण दल के साथ उपस्थित हुई, वहां खाद्य कारोबार का संचालन कर रहे व्यक्ति को अपने पद परिचय एवं अभिप्राय से अवगत कराया । खाद्य कारोबारकर्ता ने स्वयं को फर्म का मालिक बताते हुए अपना नाम जयपाल दास जुसेजा बताया और फर्म का एफएसएसए के तहत जारी रजिस्ट्रेशन दिखाया । स्वतंत्र गवाह प्रहलाद वादवानी की उपस्थिति में फर्म का निरीक्षण करने पर पाया कि वहां मानव उपभोग के लिए विक्रय हेतु डेयरी उत्पादों का निर्माण एवं संग्रहण किया गया है। उसे वहां संग्रहित खाद्य पदार्थ पनीर (लूज) एवं दही (लूज) में मिलावट की आशंका होने पर उसने उनका नमूना मानक स्तर की जांच हेतु लेने की सूचना खाद्य कारोबारकर्ता को फार्म 5ए में दी। तत्पश्चात् उसने पनीर, जो कि लगभग 25 किलोग्राम संग्रहित था में से 1 किलोग्राम पनीर तथा वहां संग्रहित लगभग 5 किलोग्राम दही में से 1 किलोग्राम दही नमूने लिए। लैब से रिपोरट् आने के बाद विभाग ने जुर्माना लगया था। डेयरी कारोबारी ने जुर्माने की राशि को जिला न्यायालय में चुनौती दी। उसकी ओर से तर्क दिया गया कि विभाग ने जुर्माना लगाऐ वक्त तथ्यों पर गौर नहीं किया। गलत तरीके से जुर्माना लगाया है। विभाग की ओर से जुर्माने का विरोध किया गया। कहा कि आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है।

Posted By: anil tomar

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