ग्वालियर (ब्यूरो)। सफाई की सीख देने वाले डॉक्टरों के लिए जिस मैस में खाना बनता है, यदि कोई उसे देख ले तो हलक से निवाला नहीं उतरे। मैस में सभी जगह गंदगी है, जिन बर्तनों में भोजन बनता है, उसमें कालिख जमी है। हॉस्टल में कूड़े के ढेर लगे हैं, जिसको देख लगता है कि कई दिनों से यहां झाडू तक नहीं लगी है। पीने के लिए ठंडा पानी तो दूर साफ पानी तक नहीं मिलता है। जूनियर डॉक्टर कई बार सफाई के लिए ज्ञापन दे चुके हैं। पीएस के साथ भी मीटिंग हुई, लेकिन समस्या का निराकरण अब तक नहीं हो सका है।

स्थान - सीनियर ब्वायज हॉस्टल

छात्र संख्या - 105 रूम में करीब 200 से अधिक छात्र रहते हैं

क्या स्थिति - गेट से घुसते ही आपको कूड़े का ढेर दिखाई देगा। साथ ही ऊपर से बहते पानी के कारण मक्खी मच्छरों की भरमार है। बिल्डिंग पूरी तरह कंडम हो चुकी है। यहां कभी भी सिर पर प्लास्टर गिरने का खतरा बना रहता है। परिसर में आवारा कुत्ते बेरोकटोक घुमते दिखाई दे जाते हैं। मैस में वाटर कूलर बंद है, दूसरा नया वाटर कूलर अब तक चालू नहीं हुआ है। खाना बनाने की जगह पर गंदगी फैली हुई है। बर्तन एवं गैस स्टैंड पर कालिख जम चुकी है, जो इशारा करती है कि यहां कई दिनों से सफाई तक नहीं हुई है।

स्थान - पीजी हॉस्टल

छात्र संख्या - 70 कक्ष में करीब 100 से अधिक छात्र रहते हैं।

क्या स्थिति - परिसर के अंदर कूड़े का ढेर लगा हुआ है। जिसको पेड़ के नीचे इकट्ठा करके रख दिया जाता है। सफाई नहीं होने से मक्खी मच्छरों की भरमार है। मैस के पास गंदगी का ढेर लगा हुआ है। जिस कक्ष में भोजन बनता है, उसके बाहर कूड़ा एकत्रित कर दिया जाता है, जिस पर मक्खी भिनभिनाती रहती हैं। जिससे संक्रमण का खतरा रहता है। मैस के पीछे भी भारी गंदगी है। मैस संचालक भी कई बार शिकायत कर चुका है, लेकिन सफाई नहीं हुई।

स्थान - सीनियर गर्ल्स हॉस्टल

छात्र संख्या - यहां पर इंटर्न एवं पीजी हॉस्टल हैं, जिसमें करीब 200 छात्राएं रहती हैं।

क्या स्थिति - बाहर गेट पर गार्ड तो है, लेकिन कौन अंदर आया-गया उसे परवाह नहीं। गेट पर ही कूड़े का ढेर लगा दिखाई देता है। पूरे परिसर में झाड़ियां उग आई हैं, जिनको कई माह से नहीं काटा गया है। छात्राओं ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि कई बार सांप भी निकल चुके हैं। हॉस्टल में मैस का भी कोई उचित इंतजाम नहीं है, दो लोगों में मैस को लेकर विवाद चल रहा है और मामला थाने तक पहुंच चुका है।

मर्जी की मैस

हॉस्टलों में डॉक्टर निवास करते हैं, लेकिन मैस का कोई ठेका नहीं दिया गया है। मनमर्जी से किसी को भी मैस चलाने का काम दे दिया गया है। जिसके कारण यह लोग साफ-सफाई तक का ध्यान नहीं रखते हैं। सीनियर गर्ल्स हॉस्टल में तो मैस के लिए लात-घूंसे तक चल चुके हैं। आग बुझाने के लिए हॉस्टलों में कहीं भी फायर इक्युपमेंट नहीं लगे हैं। ऐसे में यदि कोई आगजनी की घटना होती है तो गंभीर हादसा हो सकता है। हॉस्टलों में रहने वाले छात्र कई बार बीमार भी पड़ चुके हैं।

जल्द समस्याओं को दूर किया जाएगा

वैसे तो वार्डन यह काम देखते हैं और पहले से व्यवस्थाएं काफी बेहतर हुई हैं। यदि फिर भी कोई दिक्कत है तो हमें बताना चाहिए। मैं खुद निरीक्षण करके देखूंगा, जल्द से जल्द समस्याओं को दूर कर दिया जाएगा - डॉ. भरत जैन, डीन जीआर मेडिकल कॉलेज