ग्वालियर, (नईदुनिया प्रतिनिधि)। अपर सत्र न्यायालय ने अचलेश्वर महादेव न्यास का नया बायलाज बनाने के लिए एक कमेटी गठित करने का आदेश दिया है। इस कमेटी में किसी पूर्व पदाधिकारी या सदस्य को शामिल न किया जाए। बुद्धजीवी वर्ग की मदद ली जाए, जैसे कि इंजीनियर, डाक्टर, वकील। कमेटी के सदस्यों का अनुमोदन न्यायालय से कराएं। अलमारियों में रिकार्ड बंद हैं, उन्हें खोलने का रिसीवरों को पूरा अधिकार है। साथ ही एसडीएम अनिल बनवारिया ने जो रिकार्ड सीज किया है, उन्हें बुलाकर ताला खुलवाया जाए। कोर्ट ने रिसीवरों का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि वे एक तटस्थ व्यक्ति हैं। जिस कार्य के लिए उनकी नियुक्ति की गई है, वह एक पवित्र व धार्मिक संस्था है।

कोर्ट ने अचलेश्वर महादेव न्यास में अनियमितताएं बढ़ने पर न्यास की कार्यकारिणी भंग कर दिया था और रिसीवर नियुक्त किए। कोर्ट ने सबसे पहले विनोद भारद्वाज को रिसीवर नियुक्त किया, लेकिन उन्होंने कार्यभार संभालने के एक महीने के भीतर इस्तीफा दे दिया। जिसके चलते कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश अवधेश श्रीवास्तव को मुख्य रिसीवर व सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश संजय चतुर्वेदी को रिसीवर नियुक्त किया गया। इन्हें अपनी सुविधा के अनुसार कार्य विभाजन का आदेश दिया था। छह महीने से ये कोर्ट के आदेश पर अचलेश्वर महादेव मंदिर न्यास का संचालन कर रहे हैं। इन्हें कोर्ट ने जो जिम्मेदारी दी थी, उस पर कोई कार्य नहीं किया। जिसको लेकर कोर्ट ने नाराजगी जताई थी। कोर्ट ने 13 बिंदुओं पर रिसीवरों से रिपोर्ट मांगी थी कि उन्होंने क्या कार्य किया है। रिसीवरों ने अपने तर्क दिए।

रिसीवरों ने यह दिए तर्कः

- 23 जून 2005 का रिकार्ड अलमारी में बंद है। इसके ताले नहीं खोले गए हैं, जिसके चलते बायलाज बनाने पर कार्य नहीं हो सका। कोर्ट ने इस तर्क को लेकर कहा कि रिसीवरों को अलमारी सहित अन्य जगहों के ताले खोलने के अधिकार दिए हैं। यह संतोषजनक जवाब नहीं है।

-2021-20 का रिकार्ड भी ताले में बंद है। रिकार्ड, अलमारी व तलघर को एसडीएम अनिल बनवारिया ने सील किया था। 2021-22 की संपत्तियों का आडिट नहीं हो सका है। 2005 से 2020 तक का रिकार्ड मौजूद है। अनिल बनवारिया को बुलाकर तालेे खुलवाए जाएं।

-संपत्ति के संधारण को लेकर अलमारियां बंद होने का हवाला दिया गया, कोर्ट ने इसे उचित कारण नहीं माना।

रिसीवरों को यह करने थे कार्य, जिससे मंदिर का संचालन हो सकेः भविष्य में मंदिर का संचालन व कार्यकारिणी गठन के लिए बेहतर और पारदर्शी, सरल बायलाज तैयार करेंगे। जून 2005 बाद से लेखाओं का परीक्षण कराएंगे। परिसंपत्तियों का सत्यापन भी कराएंगे। मंदिर का निर्माण अधूरा है। उसका निर्माण कार्य पूरा कराएंगे। मंदिर की संपत्तियों की एक सूची तैयार करनी होगी। मंदिर में प्राप्त होने वाले दान को खातों में जमा करने के लिए व्यवस्था कराना होगी। कैशबुक का संधारण भी कराना होगा। मंदिर की संपत्तियों पर कोई अतिक्रमण है, उन्हें चिन्हित कर जिला प्रशासन की मदद से हटवाएंगे। दान की राशि जमा करने के लिए स्पष्ट जानकारी प्रदर्शित की जाए। दान की राशि की जिम्मेदारी किसी व्यक्तिगत को न दी जाए। दानपेटी में डाली जाए या कार्यालय में रसीद देकर जमा की जाए। मंदिर ट्रस्ट के भविष्य में होने वाले चुनाव में धर्मावलंबी व शहर के नागरिकों को जोड़ा जाए। सूचना प्रकाशित की जाए। ताकि वह भी सदस्य बन सकें। इसके लिए सदस्यता अभियान भी चलाया जाए। इस दिशा में कार्य नहीं किया था, जिसके चलते कोर्ट नाराजगी जताई थी।

Posted By: vikash.pandey

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