ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। महापौर, सभापति के बाद अब एमआईसी गठन के लिए मंथन किया जा रहा है। शुरुआत में पांच सदस्यों को महापौर की कैबिनेट में शामिल करने का अंदेशा है, लेकिन जिस हिसाब से समय लगाया जा रहा है उसे देखते हुए पूरे 10 सदस्यों के साथ ही घोषणा की जा सकती है। इसके अलावा अब भी दोनों दल सभापति चुनाव में क्रास वोटिंग करने वाले भितरघातियों की पहचान में जुटे हैं।

महापौर के बाद प्रतिष्ठा का विषय बनी सभापति की कुर्सी भाजपा के खाते में आ चुकी है, लेकिन यह सवाल अभी भी है कि दोनों ही दलों के साथ घात किसने किया है, उसकी खोजबीन शुरू हो गई है। मोटे तौर पर अनुमान भी है कि किसने घात किया है लेकिन कार्रवाई के लिए सबूत की आवश्यकता होती है बस इसी बात की खोज चल रही है। सभापति चुनाव के पहले भाजपा ने अपने पक्ष में 37 पार्षदों के होने का दावा किया था। इसके विपरीत कांग्रेस कुछ ज्यादा ही उत्साह में 38 से 40 पार्षदों को अपने पक्ष में मत देने की बात कर रही थी, जबकि हकीकत में भाजपा के पास 34 और कांग्रेस के पास 25 पार्षद थे। मतदान के बाद भाजपा को 34 मत ही मिले। इससे उसका यह दावा गलत साबित हो गया कि तीन निर्दलीय भी उसके साथ हैं। हालांकि निर्दलीय ने मत नहीं दिए अथवा भाजपा के पार्षद ने ही धोखा दिया यह जांच का विषय है। क्योंकि भाजपा ने बाल-बाल कुर्सी बचाई है। उधर कांग्रेस में विधायक डॉ सतीश सिकरवार परिणाम के बाद से ही मायूस और निराश है। वह किसी से ठीक से बात तक नहीं कर पा रहे क्योंकि उनके द्वारा पूरे विश्वास के साथ 38 से 40 पार्षदों के मत मिलने का दावा किया गया था। हालांकि उन्होंने 25 पार्षदों और महापौर मत के अलावा सात अतिरिक्त मत लाकर यह साबित कर दिया कि उनकी ताकत बरकरार है। कांग्रेस में मोटे तौर पर यह सामने भी आ गया कि उसे चोट वार्ड 29 और 54 से मिली है लेकिन दोनों ही पार्षद इतने रसूखदार हैं कि उन पर कार्यवाही आसान नहीं है। फिर भी कुछ नेताओं ने सारी जानकारी से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ को अवगत करा दिया है। अब कांग्रेस के पार्षद एमआईसी में जगह बनाने के लिए प्रयासरत हैं। शुरुआत में पार्टी का एक और चार निर्दलीय पार्षदों के साथ घोषणा करने की तैयारी की गई थी, लेकिन आंतरिक स्तर पर विरोध के बाद इसे टाल दिया गया। अब संगठन स्तर पर चर्चा करने के बाद सभी सदस्यों का नाम फाइनल किया जाएगा। इसके बाद घोषणा की जाएगी। गौरतलब है कि सभापति के चयन के 10 दिन के अंदर एमआईसी का गठन किया जाता है।

Posted By: anil tomar

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