Friendship Day Special 2022: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। किसी ने सच ही कहा है मित्रता अगर सच्ची हो तो जान देती है, समुद्र में गिरे आंसू को भी पहचान लेती है। ऐसे यारों को समर्पित मित्रता दिवस के रूप में हम सात अगस्त को मनाएंगे। दोस्ती के प्रतीक के रूप में इस दिन को मनाने का सिलसिला 1935 में अमेरिका से शुरू हुआ, जिसे धीरे-धीरे पूरी दुनिया ने आत्मसात कर लिया।

हर साल अगस्त के पहले रविवार को यारों की टोलियां एक दूसरे के प्रति समर्पण का भाव जताने के लिए कुछ न कुछ गतिविधियां करती हुई नजर आती हैं। वैसे भी कहा जाता है व्यक्ति के रिश्ते उसके जन्म से पहले ही तय हो जाते हैं, लेकिन दोस्ती ऐसी होती है, जिसका चुनाव व्यक्ति किसी के कहने पर नहीं, स्वयं करता है। सच्ची मित्रता ही जात-पात का खंडन करती है, उंच नीच और अमीरी गरीबी की दीवार को गिराती है। बड़ा उदाहारण भगवान कृष्ण और सुदामा की मित्रता का लिया जा सकता है। जब भगवान कृष्ण को पता चला, सालों बाद उनसे मिलने के लिए बाल सखा सुदामा आए हैं तो भगवान उन्हें लेने के लिए किसी सैनिक को नहीं भेजते हैं। खुद ही नंगे पैर दौड़ते हुए द्वार पर पहुंचते हैं। द्वापर युग के बाद आगे बढ़ा समय हमारे सामने दोस्ती के कई उदाहरण लेकर आया। क्यों न हम अपने दोस्त के साथ मिलकर ऐसी मिसाल पेश करें, जिसका उदाहरण आगे की पीढ़ियां दें।

अब बच्चे भी हैं मित्रः गाेविंदपुरी में रहने वाले दुष्यंत वशिष्ठ और गगन रायजादा। दोनों ने ही नाम कमाने के लिए सालों पहले शहर छोड़ दिया है। दुष्यंत दिल्ली में है, जबकि गगन जयपुर में है। दोनों ही आइटी कंपनी में है। काम के सिलसिले में किसी को कोई परेशानी आती है तो वे इसे वे अपने बास या फिर साथी के साथ शेयर नहीं करते हैं, बल्कि एक दूसरे को फोन कर अपनी समस्या रखते हैं और उसका समाधान निकालते हैं। गगन का कहना है दुष्यंत के साथ वे एलकेजी से हैं। अब राहें अलग-अलग हैं, मगर उद्देश्य एक ही है। साल में एक बार दीपावली के दिन दोनों की मुलाकात होती है। गगन और दुष्यंत के बच्चे भी एक दूसरे के दोस्त हैं। यानी मित्रता एक पीढ़ी से दूसरी पढ़ी को हस्तांतरित हो गई है।

आनंद नगर में रहने वाले अजय आर्य का कहना है 35 साल की जिंदगी में कई लोगों से मुलाकात हुई। कुछ दोस्त भी बने। समय के साथ हमने भी कदम बढ़ाए, लेकिन मजबूत दोस्त 11वीं कक्षा में आकर मिला। यह कोई और नहीं शास्त्री नगर में रहने वाला अनिरुद्ध श्रीवास्तव था, जो फिलहाल यूएसए में नौकरी कर रहा है। भारत और यूएसए के दिन रात में काफी अंतर है। जब वह दोपहर दो बजे अपने आफिस में होता है, तब मैं सो रहा होता हूं। इस बीच वह समय निकालकर मुझे काल करता है। नींद से जागकर मैं उसका फोन उठाता हूं, शायद यही सच्ची मित्रता है।

Posted By: vikash.pandey

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