ग्वालियर (नईदुनिया रिपोर्टर)। जब तक भाई की कलाई पर बहनों के स्नेह की डोर न सजे तो रक्षाबंधन का त्योहार अधूरा सा ही लगता है। बहन भाई के हाथ पर रक्षा सूत्र बांधती है तो भाई इसके बदले अपनी बहन को रक्षा का वचन देता है। लेकिन इस बार रक्षाबंधन पर कलाई पर राखी तो सजेगी, लेकिन वर्चुअली। क्योंकि कोविड-19 के कारण सुबह से शाम तक काम में व्यस्त रहने वाले भाइयों ने अपनी बहनों की सहमति से शारीरिक दूरी का पालन करते हुए रक्षाबंधन मनाने का निर्णय लिया है। जो बहनें किसी और दूसरे शहर में उन्होंने हालातों को देखते हुए खुद ही आने की मना कर दिया है। उन्होंने समय से पहले रक्षा सूत्र भेज दिए हैं, जिन्हें भाई वीडियो कॉल कर अपनी कलाई पर पहनेंगे। शहर के युवाओं का कहना है उनके लिए होली-दीपावली से बड़ा त्योहार रक्षाबंधन का रहता है। वे अपनी बहनों से प्यार करते हैं, इसलिए उन्होंने खुद ही उनसे इस बार घर न आने की बोल दिया है। कुछ भाई तो 'सिटी लाइव' को ऐसे भी मिले, जिन्होंने बहनों के लिए अपने हाथों से गिफ्ट तैयार किए हैं।

सोचा था बैंगलुरु जाऊंगा, लेकिन दीदी का है ख्याल

मॉडल और एक्टर एडी सिंह बताते हैं कि मेरी कोई रीयल सिस्टर नहीं है और इस कारण हर बार रक्षाबंधन पर कलाई सूनी ही रह जाती है। लेकिन इस बार मेरी भी कलाई पर राखी से सजेगी। मेरे प्रॉडक्शन हाउस के डायरेक्टर की बहन मुझे भी भाई मानती हैं। वे बैंगलुरू में रहती हैं। सोचा था कि पहली बार रक्षाबंधन मनाने का मौका मिल रहा है तो इस बार उनसे मिलकर ही राखी बंधवाऊंगा, लेकिन कोरोना वायरस के कारण यह संभव नहीं हो पा रहा है। इसलिए दीदी ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए समय पर राखी भेज दी है। अब यही राखी इस बार कलाई पर सजेगी और दीदी से वीडियोकॉल पर बात करूंगा।

दीदी के लिए लिखा लेटर, कुकिंग में कर रहे मदद

एक्टर जय सिंह बताते हैं कि हर साल बहनें राखी के 4 से 5 दिन पहले जाती थीं, लेकिन इस बार यह पॉसिबल नहीं हो पाया। कोई नहीं आया। लोकल मार्केट बंद है तो कोई गिफ्ट नहीं ले सका था इसलिए इस बार अपने हाथों से बहनों के लिए गिफ्ट बनाया है। अपने मन की सारी बातों को एक खत में लिखकर उन्हें भेजा है। साथ में कुछ हैंडमेड गिफ्ट भी बनाए हैं। जय ने बताया कि इस बार घर में सभी ने निर्णय लिया है कि बाजार से कोई मिठाई नहीं लाएंगे। सभी मिठाई घर पर ही बना रहे हैं और मैं भी इन्हें बनाने में मदद कर रहा हूं।

एक ही शहर में रहकर भी वर्चुअली मनाएंगे त्योहार

डॉ. अंशुल तिवारी ने बताया कि हर साल बहनें आती थीं, लेकिन इस बार तो सबकुछ वर्चुअल हो रहा है। डॉ. तिवारी ने कहा कि कोई भी बहन नहीं चाहती है कि उसका भाई कोरोना का वाहक बने या फिर कोई भाई भी नहीं चाहेगा कि उसकी बहन को कोरोना हो जाए। इसलिए इस बार यह वर्चुअली ही मनाया जाएगा। मेरी बहनें ग्वालियर में ही रहती है, लेकिन इसके बाद भी अपने-अपने घर पर ही त्योहार मनाएंगे। हम सभी भाई-बहन एक साथ ऑनलाइन होंगे और एक दूसरे के साथ रक्षाबंधन की खुशियां बांटेंगे।

बेटियां बांधेंगी राखी, ऑनलाइन लेंगे आर्शीवाद

संजीव सिंह चौहान बताते हैं कि हर साल हमारे यहां रक्षाबंधन पर बहनें और बुआ आती हैं। पूरा परिवार एक साथ पारंपरिक अंदाज में त्योहार मनाता है। सबसे बड़े से घर में राखी बंधने का सिलसिला शुरू होता है, जो छोटे सदस्य पर जाकर खत्म होता है। इस बार कोरोना के कारण न उत्तरप्रदेश से बहनें आ पाई हैं और न ही बुआ। उन सभी की राखियां आ गई हैं। सुबह पूजा के बाद बेटियां इन राखियों को बांधेंगी। इस दौरान सभी बहनें और बुआ ऑनलाइन वीडियोकॉल के जरिए जुड़ी रहेंगी। सभी ऑनलाइन ही आशीर्वाद देंगे।

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