Ganesh Chaturthi 2021: विजय सिंह राठाैर, ग्वालियर नईदुनिया। गणेश चतुर्थी पर गणेश जी की प्रतिमाएं घर-घर में स्थापित हुईं। ऐसे में शहर के गणेश मंदिरों में भी रोजाना भक्तों की कतार लगी रहती है। ज्योतिषाचार्य सुनील चोपड़ा ने बताया कि भगवान गणेश की दूर्वा, कमल के फूल, लड्डुओं से पूजा होती है व भोग लगाया जाता है। शहर में कई ऐसे मंदिर हैं, जो सदियों पुराने हैं और लोगों की आस्था के केंद्र हैं।

250 साल पुराने हैं अर्जीवाले गणेशः शहर मे शिंदे की छावनी, पेट्रोल पंप के पास में स्थित अर्जी वाले गणेश जी 250 साल से विराजे हैं। अर्जी वाले गणेश जी के दरबार में यूं तो बच्चे-बूढ़े जवान सभी अपनी अर्जी लगाते हैं, लेकिन यहां शादी की विघ्न बाधाएं दूर करने की अर्जी लगाने वाले खासतौर पर आते हैं। कहा जाता है कि विघ्नहर्ता उनकी इच्छा पूरी करते हैं और लाेग यहां शादी के बाद मन्नत उतारने खास पूजा करने आते हैं।

गणेश मंदिर हरिशंकरपुरमः हरीशंकरपुरम स्थित 250 साल पुराना भगवान गणेश का मंदिर काफी भव्यता लिए हुए है। मंदिर का निर्माण पूर्णत: पत्थर से किया गया है। साथ ही इन पत्थरों पर देवी-देवताओं, नाग, गंधर्व आदि की प्रतिमाओं को भी तराशा गया है। मंदिर का निर्माण नागरशैली से किया गया है।

मोटे गणेश खासगी बाजारः मोटे गणेश खासगी बाजार, चावड़ी बाजार के पास बहुत पुराना मंदिर है। जहां गणेश चतुर्थी के दिन श्रद्धालुओं ने पूजा अर्चना की।

450 साल पुराना है लधेड़ी स्थित गणेश मंदिरः बताया जाता है कि श्रीजी का ये मंदिर करीब 450 वर्ष पुराना है और इसे बाजीराव पेशवा ने बनवाया था। लधेड़ी स्थित संकट मोचन गणेश मंदिर की मूर्ति की खासियत यह है कि इसमें गणेश भगवान मूषक पर पद्मासन पर विराजमान हैं। वहीं आमतौर पर मूषक मूर्ति के आसपास होते हैं। इसके साथ ही गणेश की प्रतिमा की कमर पर नाग सुशोभित हैं।

Posted By: vikash.pandey

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