Garbage burning in Gwalior: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर की टूटी हुई सड़कों व शहर में चल रही तोड़फोड़ से उठती धूल व कचरा जलने से उठता हुआ धुआं शहर का वातावरण खराब कर रहा है। शहर में यह दो प्रमुख कारण प्रदूषण के स्तर को बढ़ाने के सहायक बने हुए हैं। जिस पर नगर निगम, प्रशासन, व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड नियंत्रण नहीं लगा पा रहा है। स्थानीय लोग भी कचरा जलाने वालों को नहीं रोक पा रहे हैं। यह अनदेखी शहरवासियों के स्वास्थ्य पर असर डाल रहा है। हालात यह है कि शहर में वायु प्रदूषण का स्तर 229 है। ग्वालियर गैस चैंबर बन रहा है,फिर भी जिम्मेदार बेखबर है। 16 और 17 नवंबर को धूप खिलने के साथ ही हवा में नमी कम हुई तो ठंड का स्तर भी घटा था। लेकिन 18 नंबर से फिर से हवा में नमी बढ़ने से मौसम में ठंडक बढ़ने लगी। ठंडक बढ़ने के साथ ही प्रदूषण का स्तर भी बढ़ा। उसका करण यह था कि हवा में नमी बढ़ने से सड़क से उठने वाली धूल व धुआं आसमान में नहीं निकल सका। हवा में नमी ने जमीन से ऊपर आसमान में एक परत बना दी,जिसे जमीन से उठने वाली धूल व धुआं बाहर नहीं निकल पा रहा है। इस कारण से प्रदूषण का स्तर बढ़ता जा रहा है।पिछले तीन दिन में पीएम2.5 का मान तेजी से बढ़ा है। मौसम में ठंडक बढ़ने के साथ ही शहर में जगह जगह कचरा जल रहा है। सुबह के समय सफाई कर्मी झडू लगाकर कचरा एक जगह एकत्रित कर देते हैं। लेकिन नगर निगम का वाहन इस कचरे को समय पर नहीं उठाता। जिसको लेकर कभी तो सफाई कर्मी तो कभी स्थानीय लोग इस कचरे में आग लगा देते हैं। जिससे प्रदूषण बढ़ रहा है। शहर में प्रदूषण का रियल टाइम आंकड़ा बताने वाले चार सब स्टेशन चालू हो चुके हैं। फूलबाग,महाराजबाड़ा और सिटी सेंटर परआन लाइन आंकड़े दिखाने के लिए स्टेशन पहले से संचालित हो रहे थे अब 17 नंबर से डीडी नगर का भी सब स्टेशन चालू हाे चुका है।

Posted By: anil tomar

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