ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। स्थापना के साथ ही आत्मनिर्भर हो चुकी है रानीघाटी गोशाला में गोसंवर्धन का काम भी शुरू हो गया है। गायों की नस्ल को सुधारकर ज्यादा दूध देने वाली थारपारकर नस्ल को विकसित किया जाएगा। इस नस्ल की उत्पत्ति पाकिस्तान के सिंध प्रांत के थारपारकर जिले की मानी जाती है। भारत में राजस्थान के जोधपुर, गुजरात के कच्छ जिलों में यह पाई जाती है। यह गाय दिन में 8 से 10 लीटर दूध देती है। नस्ल सुधार के लिए गोशाला में इस नस्ल के नंदी आ चुके हैं।

रानीघाटी गोशाला का निर्माण जिला पंचायत द्वारा किया गया है। गोशाला के शुरू होते ही यहां पर गायों की देखभाल कर रहे श्रीकृष्णायन देसी गोरक्षाशाला के संतों ने गोसंवर्धन का कार्य शुरू कर दिया है। क्योंकि गोशाला में लाई जा रहीं अधिकांश गायों को ग्रामीणों ने विदेशी नस्ल से क्रॉस कराकर उनकी नस्ल खराब कर दी थी। नस्ल खराब होने के कारण गायों के दूध देने की क्षमता भी प्रभावित हुई है। पहले जो गाय 8 से 10 माह तक दूध देती थी वह घटकर 4 से 6 माह दूध देने वाली रह गई है। साथ ही दूध का उत्पादन भी घटकर प्रति गाय से 1 से 2 लीटर रह गया है।

इन नस्लों की गाय होंगी तैयार

रानीघाटी गोशाला में ज्यादा दूध देने वालीं देसी गायों की नस्लांे को तैयार किया जाएगा। इसमें थारपारकर, काकरेच, हरियाणवी, गिर, मालवीय नस्ल शामिल हैं। रानीघाटी गोशाला में दो थारपारकर नस्ल के नंदी आ चुके हैं। साथ ही तीन हरियाणवी नस्ल के नंदी भी लाए गए हैं। जबकि स्थानीय मालवीय नस्ल के कुछ बेहतर नंदी भी गोशाला में लाए जा चुके हैं।

क्षेत्र के हिसाब से नस्ल के रखे हैं नाम

भारत में पाई जाने वाली करीब 43 प्रकार की देसी गाय हैं। इनमें गिर, काकरेच, रेड सिंधी, थारपारकर, हरियाणवी, साहीवाल, मालवीय, निवाड़ी, जवरी, हल्लीकार, औंगोल, कांगायाम, अंब्लाचेरी, बारगूर, कारसगौड़, देवनी, लाल कंधारी, गावलव, सिंधी, कृष्णा आदि नस्ल की देसी गाय पाई जाती हैं।

अधिकांश 8 लीटर तक दूध देती हैं गाय

भारतीय नस्ल की अधिकांश देसी गाय 8 लीटर तक दूध देती हैं। जबकि साहीवाल, हरियाणवी, थारपारकर व काकरेच गाय का दूध 10 से 12 लीटर तक होता है। इसी प्रकार गिर नस्ल की गाय 22 से 28 लीटर तक दूध देती है।

ऐसे बिगड़ी देसी गायों की नस्ल

कहा जाता है कि भारत में प्राचीनकाल में दूध की नदियां बहती थीं। इसका कारण था देसी नस्ल की गायों का बहुतादाद में होना, लेकिन आजादी के बाद विदेशी नस्ल के नंदियों से देसी गायों को क्रॉस कराने के कारण इनकी नस्ल खराब हो गई। जिसके कारण गायों के दूध देने की क्षमता भी खराब हुई और यह बहुत कम समय तक ही दूध दे पाती हैं।

रानीघाटी गोशाला में गोसंवर्धन का कार्य प्रारंभ हो चुका है। यहां पर गिर, थारपारकर व हरियाणवी नस्ल के नंदियों को लाया जा चुका है। आने वाले कुछ सालों में इन नस्लों की गाय तैयार हो जाएंगी। ऋषि महाराज, श्री कृष्णायन देसी गोरक्षा शाला

Posted By: Prashant Pandey

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

नईदुनिया ई-पेपर पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करे

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

डाउनलोड करें नईदुनिया ऐप | पाएं मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और देश-दुनिया की सभी खबरों के साथ नईदुनिया ई-पेपर,राशिफल और कई फायदेमंद सर्विसेस

ipl 2020
ipl 2020