Guru Purnima 2021: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। गुरु पूर्णिमा पर इस बार मठ-मंदिर व आश्रमों में विशेष कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा। शिष्यों को कान में गुरुदेव इस बार गुरुमंत्र भी नहीं देंगे, बल्कि कागज पर लिखकर व वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से गुरू दीक्षा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। श्री पूरण वैराठी सिद्धपीठ श्री गंगा दास जी की बड़ी शाला लक्ष्मीबाई कालोनी में गुरु पूर्णिमा पर हर साल होने वाला पारंपरागत विशाल आयोजन नहीं होगा। पीठाधीश्वर स्वामी रामसेवक दास महाराज का कहना है कि कोरोना गाइडलाइन का पालन करना वक्त की जरूरत है। ऐसे में भक्तगण गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी अपने घर रह कर ही गुरु पूजन संपन्न करें। समय मिलने पर कभी भी आश्रम पर आकर दर्शन कर सकते हैं। सभी को हमारा आशीर्वाद रहेगा। वहीं सनातन धर्म मंदिर के प्रधानमंत्री महेश नीखरा का कहना है कि गुरुपूर्णिमा पर भगवान चक्रधर का विशेष श्रृंगार किया जाएगा। सनातन धर्म मंदिर में विशेष आयोजन नहीं होगा, हालांकि श्रद्धालु शारीरिक दूरी का पालन करते हुए परिक्रमा करने आ सकेंगे। वहीं भक्त मथुरा-वृंदावन नहीं जा सकेंगे, जिसके कारण वे गिर्राज जी भगवान की परिक्रमा गुरुपूर्णिमा पर नहीं लगा सकेंगे। इसलिए शहर में स्थित गिर्राज जी मंदिर में भीड़ उमड़ने की आशंका है। मंदिर में कोई विशेष आयोजन इस बार नहीं किया जा रहा है। धार्मिक गुरुओं ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे उनके पास न आएं, क्योंकि उनका आशीर्वाद सदैव उनके साथ है।ज्याेतिषाचार्य पं. सतीश सोनी के अनुसार इस बार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दो दिन रहेगी। 23 तथा 24 जुलाई को गुरुपूर्णिमा मनाई जाएगी। उदया तिथि में पूर्णिमा मनाने वाले गुरु साधक 24 जुलाई को गुरु पूर्णिमा मनाएंगे। जबकि पूर्णिमा तिथि 23 जुलाई सुबह 10:44 से ही शुरू होने के कारण अन्य गुरु साधक 23 को भी गुरु पूर्णिमा मनाएंगे। 24 जुलाई को प्रीति योग और सर्वार्थ सिद्धी योग भी रहेगा। उदया कालीन पूर्णिमा तिथि होने से गुरु पूर्णिमा 24 जुलाई को मध्यप्रदेश में मनाई जाएगी। सत्यनारायण भगवान का पूर्णिमा व्रत भी 24 जुलाई को ही होगा। इस दिन शिष्य अपने गुरुदेव का पादुका पूजन करेंगे। जिनके गुरु नहीं है, वे अपना नया गुरु धारण करेंगे।

गुरुपूर्णिमा से होता है वर्षा ऋतु का आरंभ: ज्योतिषाचार्य डा. हुकुमचंद जैन ने बताया कि पंचांग के अनुसार गुरुपूर्णिमा से ही वर्षा ऋतु का आरंभ व आषाढ़ मास का समापन होता है। इसके बाद श्रावण यानी सावन का महीना प्रारंभ होता है। इस दिन स्नान, दान का भी विशेष महत्व बताया गया है। गुरु पूर्णिमा पर घर को स्वच्छ करें और उत्तर दिशा में श्वेत वस्त्र पर गुरु का चित्र मूर्ति आदि को श्रद्धा भाव से स्थापित करें। फूल चढ़ाएं, माला पहनाएं इसके उपरांत फल और मिष्ठान अर्पित करना चाहिए। इतना ही नहीं इस दिन पीले वस्त्र धारण करना अच्छा माना गया है। यदि गुरु प्रत्यक्ष न हों तो वस्त्र, फल, मिष्ठान और अनाज आदि का दान करना चाहिए। यदि सामने साक्षात गुरु हैं, तो उच्चासन पर विराजमान कर श्रद्धा व विनय पूर्वक उनका पूजन व आरती कर आशीर्वाद लें, यथा शक्ति दक्षिणा अर्पित करें।

Posted By: vikash.pandey

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