- 13 जुलाई बुधवार को मनाई जाएगी

ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। आषाढ़ मास में पढ़ने वाली पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस बार गुरु पूर्णिमा 13 जुलाई बुधवार को मनाई जाएगी। इसके लिए अभी से गुरु आश्रम, मंदिरों और मठों में तैयारी शुरू कर दी गई है। बालाजी धाम काली माता मंदिर के ज्योतिषाचार्य डा. सतीश सोनी के अनुसार इस दिन चारों वेदों का ज्ञान देने वाले महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। इसी वजह से इसे वेद व्यास पूर्णिमा भी कहा जाता है। शिव पुराण में वेदव्यास जी भगवान विष्णु के अशंअवतार कहे गए हैं। ऐसे में पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व होता है। महर्षि वेदव्यास ने हीं पहली बार मानव जाति को चारों वेदों का ज्ञान दिया था। इसलिए उन्हें सृष्टि के पहले गुरु का दर्जा प्राप्त है। यही वजह है। कि प्रत्येक वर्ष आषाढ़ माह की पूर्णिमा तिथि को आषाढ़ पूर्णिमा व्यास पूर्णिमा और गुरु पूर्णिमा के तौर पर बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

डॉ. सोनी ने बताया इस बार गुरु पूर्णिमा पर पांच राजयोगों में गुरु पूजन होगा। इस दिन पूर्णिमा के दिन मंगल, बुध, गुरु और शनि शुभ स्थिति में विराजमान रहेंगे। इस स्थिति के कारण गुरु पूर्णिमा पर रूचक योग, भद्र योग, हंस योग और शश नामक राजयोग का निर्माण होगा। साथ ही बुधादित्य योग भी रहेगा। गुरु पूर्णिमा तिथि 13 जुलाई बुधवार प्रातः 4:02 से प्रारंभ होकर 14 जुलाई रात्रि 12:05 तक रहेगी।

क्या करें

- इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ गुरु पूजन और गुरु पादुका पूजन करें।

- आटे की पंजीरी ,पंचामृत बनाकर इस का भोग लगाएं। पीले अनाज, पीली मिठाइयां, पीले वस्त्र, जरूरतमंदों को दान करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।

- गुरु से मंत्र दीक्षा इस दिन ग्रहण करें। तथा गुरुजनों की यथासंभव सेवा श्रद्धा पूर्वक अवश्य करें।

Posted By: anil tomar

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