Gwalior Administrative News: वरुण शर्मा, ग्वालियर नईदुनिया। टाइम लिमिट में पूरी होने वाली शिकायतें और सीएम हेल्पलाइन को लेकर सोमवार को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने दस घंटे की मैराथन बैठक ली थी। जिसका असर मंगलवार से दिखाई भी देने लगा है। सभी विभाग अपने-अपने दफ्तरों में पेंडिंग शिकायतों को ढूंढने में लग गए हैं। साथ ही शिकायताें का निराकरण भी करना शुुरू कर दिया है। इसकी रिपाेर्ट कलेक्टर काे भी भेजी जा रही है। कलेक्ट्रेट में सुबह 11 बजे से शुरू हुई बैठक रात नौ बजे तक चली थी, जिसमें दोपहर का खाना भी कलेक्टर ने होटल से मंगवा लिया था। टीएल पत्रक की सबसे ज्यादा पेंडेंसी 127 स्वास्थ्य विभाग की रही और इसके बाद नगर निगम सहित अन्य विभागों की शिकायतें थीं। कलेक्टर ने निगम के अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता से पेंडेंसी पर कहा कि आपकी सर्विस ब्रेक दूंगा,ऐसा नहीं बर्दाश्त होगा। वहीं सबसे ज्यादा सीएमएचओ डा मनीष शर्मा को फटकार लगी, क्योंकि पेंडेंसी सबसे ज्यादा थी।

यह हुई थी कार्रवाईः विभागवार समीक्षा के दौरान समय-सीमा वाले पत्रों सहित अन्य जन शिकायतों के निराकरण में लापरवाही व ढ़िलाई सामने आने पर कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डा मनीष शर्मा और नगर निगम के अपर आयुक्त मुकुल गुप्ता को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए थे। साथ ही नगर निगम के संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियाें के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए, जिनकी लापरवाही की वजह से जन शिकायतों के निराकरण में देरी हुई है।कलेक्टर ने स्वास्थ्य विभाग के समय-सीमा वाले पत्रों के निराकरण में लापरवाही सामने आने पर डा. सचिन श्रीवास्तव की एक वेतन वृद्धि संचयी प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए हैं। साथ ही कहा है कि इनकी पदस्थापना प्रशासनिक पद पर न की जाए। उन्होंने टीएल के निराकरण में देरी के लिए जिम्मेदार मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय में पदस्थ सहायक वर्ग-3 संजय जोशी के खिलाफ निलंबन के निर्देश दिए। स्वास्थ्य विभाग की एक शिकायत के निराकरण में लापरवाही सामने आने पर शिकायत का निराकरण होने तक जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. मनोज कौरव का वेतन रोकने के निर्देश भी बैठक में दिए।

Posted By: vikash.pandey

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