Gwalior Agricultural University News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कृषि विश्वविद्यालय के बाहर धरने पर बैठे अध्यापक व वैज्ञानिकों को अब छात्रों का भी समर्थन मिल सकता है। कृषि छात्रों ने शासन को पत्र लिखा है कि अध्यापक और वैज्ञानिकों की दस मांगों को माने। जिससे उनकी पढ़ाई चालू हो सके और कृषि वैज्ञानिक शोध कार्य कर किसानों को बेहतर तकनीक व बीज उपलब्ध करा सकेंगे। अध्यापक व वैज्ञानिकों के आंदोलन से यह कार्य प्रभावित हो रहे हैं। यदि अध्यापक व वैज्ञानिकों की मांगों को नहीं माना गया तो छात्र भी आंदोलन में शामिल होंगे।

गौरतलब है कि 11 जनवरी से कृषि महाविद्यालय के अध्यापक व वैज्ञानिक सातवें वेतनमान,पदाेन्नति सहित दस मांगों को लेकर 11 जनवरी से हड़ताल पर थे। डा.राज कुशवाह का कहना था कि शुरू में तो काली प

ट्टी बांधकर काम किया, पर जब शासन ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो 18 जनवरी से कृषि विश्वविद्यालय के गेट पर धरने पर बैठ गए। इसके उन्होंने अपनी बात को राज्यसभा सदस्य ज्याेतिरादित्य सिंधिया से लेकर केन्द्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह ताेमर तक के सामने रखी, मगर उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो सका तो उन्होंने सुंदरकांड का पाठ से लेकर सदबुद्ध के लिए हवन भी किया। इसके बाद भी अब तक उनकी समस्याओं का समधान नहीं निकल सका।

सरकार की बढेगी मुश्किलः कृषि विश्वविद्यालय के अध्यापक एवं वैज्ञानिकाें का आंदाेलन पहले से ही सरकार के लिए मुश्किल का कारण बना हुआ है, यदि इसमें छात्र भी शामिल हाे गए ताे सरकार की परेशानी बढ़ सकती है। हालांकि जल्द ही सीएम शिवराज सिंह चाैहान का ग्वालियर दाैरा प्रस्तावित है, एेसे में अध्यापक अपनी मांगाे काे सीएम के समक्ष रखने पर भी विचार कर रहे हैं।

Posted By: vikash.pandey

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