-15 नवंबर से समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू होने की संभावना

Gwalior Agriculture News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। मानसून की बारिश देर से होने के कारण किसान ज्वार-बाजरा की फसल की बोवनी नहीं कर पाए थे, इसके बाद भी जिले में पंजीयन बंपर हुए हैं। पिछले साल की तुलना में इस बार ज्वार व बाजरा के 3679 पंजीयन अधिक हुए हैं, जिसमें 2514 ज्वार व 1165 बाजरा के पंजीयन हैं। ज्वार-बाजरा की फसल कम होने के बाद भी पंजीयन अधिक होने पर अधिकारी हैरान हैं। अब ये पंजीयन संदेह के घेरे में आ गए हैं। जिला आपूर्ति अधिकारी ने राजस्व अमले को पंजीयनों के सत्यापन के आदेश दिए हैं। वहीं दूसरी ओर भोपाल की टीम भी जिले के निरीक्षण पर आई है। उन्होंने गांवों के निरीक्षण किए हैं। इसके अलावा जिले में समर्थन मूल्य पर 15 नवंबर से खरीद संभावित है।

ज्वार व बाजरा की फसल जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के दो सप्ताह के भीतर बुवाई की जाती है, लेकिन इस बार जिले में मानसून की बारिश 20 जुलाई के बाद हुई थी। बारिश शुरू होने के बाद थमी नहीं और 10 अगस्त तक बारिश का सिलसिला जारी रहा। अगस्त के अंत तक खेतों में जुताई नहीं हुई। इस कारण इन फसलों की बुवाई नहीं हो सकी। जुलाई के अंत व अगस्त में अच्छी बारिश होने से धान की रुपाई अधिक हुई। एक लाख हेक्टेयर भूमि पर धान की रुपाई की गई। खरीफ की फसल प्रभावित होने के बाद भी पंजीयन में गिरावट नहीं आई है। पिछले साल की तुलना में बढ़ोतरी हो गई। इस बार धान, बाजरा, ज्वार के पंजीयन में बढ़ोतरी दर्ज हुई, लेकिन सबसे ज्यादा बढ़ोतरी ज्वार में हुई, क्योंकि इसका समर्थन मूल्य ज्यादा है।

पिछले साल खरीद पर हुआ था उपद्रव

-जिला सहित अंचल में सरकारी खरीद कांटों पर काफी उपद्रव हुआ था। राजस्थान व उत्तर प्रदेश से बाजरा खरीदकर ग्वालियर-चंबल में बेचा गया। बिचौलियों ने इसका बड़ा फायदा उठाया। मुरैना में एफआइआर भी दर्ज हुई थी।

- ग्वालियर में राजस्थान व उत्तर प्रदेश का ज्वार व बाजरा लाया गया था। उत्तर प्रदेश की धान लाए जाने के मामले में समिति प्रबंधक व ट्रांसपोर्टर बड़ागांव के पास हाइवे पर पकड़े गए थे। गोदाम में माल जमा कराने से पहले समिति की पर्चियां लगाई जा रही थीं। खाद्य विभाग ने ट्रांसपोर्टर व समिति प्रबंधकों के खिलाफ केस भी दर्ज कराया था।

- इस साल वैसी ही स्थिति बन रही है। ज्वार व बाजरा पर काफी मुनाफा है। दूसरे राज्यों का माल ग्वालियर में खपाने की तैयारी है। ज्वारा व बाजरा के पंजीयन अधिक हुए हैं।

- वर्मतान में मंडी में ज्वार 1450 से 1600 रुपये क्विंटल चल रही है, जबकि बाजरा 1500 रुपये क्विंटल तक बिक रहा है। समर्थन मूल्य व मंडी भाव में काफी अंतर है। ज्वार में दोगुना अंतर है। बाजरा में 750 रुपये का अंतर है।

पिछोर में आई थी बाढ़, पर ज्वार-बाजरा के पंजीयन अधिक

-इस बार पिछोर में सिंध नदी की बाढ़ आई थी। यहां पर बाढ़ में काफी हिस्सा डूब गया था, लेकिन गिरदावरी में ज्वार व बाजरा भरा गया। इस क्षेत्र में सबसे ज्यादा ज्वार व बाजरा के पंजीयन हुए हैं। पिछोर का आधा हिस्सा धान का है। जहां ज्वार व बाजरा की संभावना है, वह हिस्से बाढ़ में डूब गए थे।

- पुरानी हरसी नहर व हरसी हाई लेवल नहर खुल जाने से भितरवार व डबरा की अधिकतर जमीन पर धान है, लेकिन ज्वार व बाजरा के पंजीयन बंपर हुए हैं।

दतिया में फर्जी पंजीयन पर एफआइआर

धान का फर्जी पंजीयन कराए जाने पर दतिया में दो केस दर्ज किए गए हैं। दतिया में धान के 11 हजार पंजीयन हुए हैं। ज्वार व बाजरा के 862 पंजीयन हुए हैं। हालंकि पंजीयन का सत्यापन किया जा रहा है। फर्जीवाड़ा और उजागर हो सकता है।

ग्वालियर में किसानों के पंजीयन पर एक नजर

फसल 2021 2020 बढ़ोतरी

धान 14664 12472 2192

ज्वार 5814 3300 2514

बाजरा 3743 2578 1165

सरकारी कांटें पर भाव

ज्वार 2738

बाजरा 2250

धान 1940

(यह भाव प्रति क्विंटल के हैं।)

इतनी जमीन पर फसल बताई

वर्ष जमीन हेक्टेयर

2021 73484

2020 65585

बढ़ोतरी- 7899

इनका कहना है

- समर्थन मूल्य पर फसल बेचने के लिए जो पंजीयन किए गए हैं, उन पर संदेह है। इसको लेकर खाद्य विभाग को भी एक पत्र जारी कर दिया है। सभी एसडीएम को पंजीयन के सत्यापन के निर्देश दिए गए हैं। यदि किसी ने गलत पंजीयन किए हैं, संबंधित व्यक्ति पर एफआइआर दर्ज कराई जाएगी।

कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर ग्वालियर

Posted By: anil.tomar

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