Gwalior Ambedkar Jayanti News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। ग्वालियर पूर्व विधानसभा के 19 वार्डों में बुधवार को जगह-जगह कांग्रेस विधायक डा.सतीश सिकरवार के नेतृत्व में संविधान निर्माता बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती मनाई गई।

इस अवसर पर सिकरवार ने 19 वार्डों में अलग-अलग समय पर आयोजित कार्यक्रमों में 2100 महिला-पुरुषों को सम्मानित किया, साथ ही मिष्ठान वितरण व आतिशबाजी भी की गई। विभिन्ना वार्डों में सिकरवार ने कहा कि आंबेडकर के पथ पर चलकर ही युवा, शोषित-पीड़ित समाज को आगे बढ़ा सकता है। उन्होंने सर्वहारा वर्ग के उत्थान के लिए अनेक क्रांतकारी कदम उठाए, जो आज फलीभूत हो रहे हैं। विधायक सिकरवार ने वार्ड 8 में सुबह 9 बजे आंबेडकर पार्क दीनदयाल नगर, वार्ड 19 में सुबह 9:30 बजे जाटव समाज धर्मशाला जड़ेरूआ, वार्ड 20 में सुबह 10 बजे अशोक कालोनी पानी की टंकी के पास, वार्ड 21 में सुबह 10:30 बजे पंचशील नगर पार्क व वार्ड 60 में शाम 6 बजे आंबेडकर पार्क हुरावली नवीन आरटीओ के पास व अन्य वार्डों में कार्यक्रम आयोजित किए गए।

समाज में हर वर्ग को समानता दिलाने हमें प्रयास करना चाहिए: आर्यांश कॉलेज व जादौन आइएएस संस्थान के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को भारत रत्न डा. भीमराव आंबेडकर की जयंती के अवसर पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में चेयरमैन आनंद जादौन उपिस्थत रहे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में सहायक प्राध्यापक डा. लक्ष्मण प्रसाद, डा. डीडी पचौरी, डा. सुनीता भदौरिया, डा. स्मिता पॉल, डा. संदीप करंदीकर, प्रो. अकिंत नीखरा व डायरेक्टर सीपीएस जादौन उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता रजिस्ट्रार प्रो. जितेंद्र शर्मा ने की। कार्यक्रम का संयोजन डा. जयप्रकाश खरे ने किया। कार्यक्रम का शुभांरभ सरस्वती पूजन से किया गया। इसके बाद भारत रत्न बाबा साहब डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा पर पुष्पहार अर्पित कर सभी ने नमन किया। सभी विशिष्ट अतिथियों ने बाबा साहब के जीवन के स्मरणीय प्रसंगों के माध्यम से सामाजिक एकता, अखंडता व समरसता बनाए रखने व उनके विचारों को जीवन में धारण करने की बात कही। साथ ही आनंद जादौन ने बाबा साहब के जीवन के संघर्ष व उनकी जीवन सम्मत अवधारणा को विभिन्ना प्रसंगों द्वारा परिलक्षित करते हुए कहा कि बाबा साहब हमेशा से ही जाति भेद विहीन समाज में विश्वास रखते थे। उनका मानना था कि समाज में जाति, रंग या वर्ण भेद न हो, बल्कि सभी एक परिसंघात्मक संवैधानिक व्यवस्था में समरसता व समानता को मूलभूत सिद्धांत मानकर राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनें। इसी परिकल्पना के साथ बाबा साहब ने सविंधान की रचना की, जिससे भारत अनेकता में एकता को वास्तविक रूप से परिभाषित कर सके।

Posted By: anil.tomar

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