- सहयोगी रहे साहित्यकार जगदीश तोमर ने सुनाए संस्मरण

जोगेंद्र सेन. ग्वालियर। पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी देश निर्माण में युवाओं की भूमिका को बहुत महत्वपूर्ण मानते थे। उनका स्पष्ट विचार था कि अनुशासित युवा ही देश को नई दिशा दे सकता है। इस बात को याद करते हुए ग्वालियर के जाने-माने साहित्यकार जगदीश तोमर भावुक हो उठते हैं। अटल जी से उनकी मुलाकात युवावस्था में ही हुई थी। जगदीश तोमर बताते हैं कि एक बार युवाओं का जुलूस निकल रहा था। एक युवा के हाथ में तख्ती थी कि स्कूल, कालेज में हाजिरी नहीं लगनी चाहिए, फीस नहीं लगनी चाहिए। परीक्षाएं भी नहीं होनी चाहिए। मैं भी उसमें शामिल था। अटलजी ने मुझसे पूछा कि आगे क्या करने का विचार है। मैंने कहा कि अभी कुछ सोचा नहीं है। उन्होंने कहा कि एमए प्रथम वर्ष के छात्र हो। अभी तक दिशा ही तय नहीं की। कुछ समय राष्ट्र के लिए भी निकालो। आप लोग ही देश को दिशा दे सकते हो।

एक ही चुनाव में तीनों अनुभव हो गए थे

जगदीश तोमर अटल बिहारी वाजपेयी के एक रोचक किस्से को याद करते हुए बताते हैं कि मैं उस समय एमएलबी कालेज ग्वालियर में अध्ययनरत था। अटलजी इसी कालेज के छात्र रह चुके थे इसलिए लोकसभा का पहला चुनाव जीतने के बाद उन्हें सम्मान के लिए आमंत्रित किया गया। सम्मान समारोह में अटलजी से हम लोगों से संवाद किया। कम उम्र में चुनाव जीतने पर उन्होंने हंसते हुए कहा कि एक ही चुनाव में तीनों अनुभव हो गए। पार्टी ने उन्हें तीन संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़ाया था। एक जगह से जमानत जब्त हो गई। दूसरे लोकसभा क्षेत्र में हार गया और तीसरे लोकसभा क्षेत्र से जीतकर आप लोगों के बीच में हूं।

चाचाजी (अटल जी) जो साड़ी लेकर आए थे, उसे आज रखा है सहेजकर

अटल बिहारी वाजपेयी के बड़े भाई सदाबिहारी वाजपेयी की बेटी कांति मिश्रा की आंखें अटलजी की यादों को टटोलते ही चमक उठती हैं। ग्वालियर के कमलसिंह का बाग स्थित अटल जी के पुश्तैनी मकान रहने वाली कांति मिश्रा (जिन्हें सभी कांति बुआ के नाम से पुकारते हैं) बताती हैं कि बात 2004 की है। उस समय चाचाजी (अटल बिहारी वाजपेयी) प्रधानमंत्री थे। चार मई की बेटे पंकज मिश्रा की शादी थी। नाते-रिश्तेदारों में इस बात की चर्चा थी कि अटल जी वाजपेयी काफी व्यस्त हैं। वे विवाह में शामिल होने नहीं आ पाएंगे। उनकी व्यस्तताओं को देखते हुए हम लोगों को भी कम ही आशा थी। एक दिन पीएम हाउस से फोन आया कि अटल जी ग्वालियर आ रहे हैं। हम लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं था। हम सब लोग सर्किट हाउस पहुंच गए। अटल जी सबसे आत्मीयता से मिले। समधी ने अटल जी की काफी आव-भगत की। अटल जी ने विश्राम गृह में उपहारस्वरूप मेरे हाथ पर साड़ी व उस पर 10 हजार रुपये रखे। वो साड़ी उन्होंने आज भी उनकी यादों के साथ सहेज कर रखी है।

Posted By: anil tomar

NaiDunia Local
NaiDunia Local
  • Font Size
  • Close