Gwalior Balbir Singh Column: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। सिरोल रोड स्थित ठाकुर के घर छापे में मिली डायरी ने अफसरों की चिंताए बढ़ा दी है। इस डायरी में उन लोगों के नाम लिखे हैं, जिन्हें ठाकुर साहब ने हर महीने सेवा में कुछ न कुछ दिया है। डायरी में पांच साल का लेखा-जोखा दर्ज है। इंटरनेट मीडिया के माध्यम से डायरी के पन्ने विरोधियों के पास आ चुके हैं। विरोधियों ने उन्हीं पन्नों को आधार बनाते हुए शिकायत भेजना शुरू कर दी है। डायरी के यह पन्ने नई ठिकाने की राह में रोड़ा बन गए हैं। ठाकुर साहब ने जहां से अकूत संपत्ति कमाई है, उस जगह का खुलासा भी हो गया है। इसके बाद भी ठाकुर साहब को उस संस्था से नहीं हटाया है, अभी उन्हीं पर भरोसा है। अवैध रूप से भवन कमेटी में जगह बनाई थी, वह बरकरार है। इनके कंधों पर करोड़ों के काम की जिम्मेदारी जो है।

मेंबर का नया शाेधः अंचल के सबसे बड़े शिक्षा के मंदिर के वकील मेंबर व ठाकुर साहब का नया शोध चल रहा है। शोध परीक्षा को लेकर अतिथि गृह में एक बैठक भी हो चुकी है। इस बैठक में रोल नंबर की पड़ताल की जा रही थी। शोध कामयाब होता भी दिख रहा है। इस बार शोध परीक्षा में फेल होने वालों की संख्या भी अधिक है। इस वजह से पास होने की जुगत में कई लोग घूम रहे हैं। इसका पूरा फायदा मेंबर उठाना चाहते हैं। मेंबर सिस्टर परीक्षा की तरह शोध परीक्षा में भी फर्जीवाड़े को अंजाम देने की तैयारी में है। परिसर में चक्कर लगाने भी शुरू कर दिए हैं। उनका नाम ओपन रूप से चलने लगा है कि शोध परीक्षा पास करनी है तो मेंबर से मिल लो। इनके संपर्क में परीक्षार्थी आने भी लगे हैं। इनके हर कदम पर दूसरे भी नजर रखे हैं।

मुखिया के पद पर कछुआ वाले साहब की नजरः अंचल के सबसे बड़े शिक्षा के मंदिर के मुखिया के पद पर कछुआ वाले साहब की भी नजर है। उन्होंने अपनी सेवा निवृत्ति के चंद दिन पहले आवेदन भी करा दिया है। कछुआ वाले साहब भोपाल से ग्वालियर आना चाहते हैं। उनका साथ शिक्षा के मंदिर की माइक-1 भी दे रही हैं। शिक्षा के मंदिर में माइक-1 ने जिन कारनामों को अंजाम दिया है, वह मुखिया बदलने के बाद बाहर न आएं, इसलिए कछुआ वाले साहब को लाना अब प्राथमिकता है। साहब ने भी मुखिया के पद के लिए जोड़तोड़ शुरू कर दी है। शिक्षा के मंदिर के माइक-2 भी पीछे नहीं हैं, उन्होंने भी अपनी ताकत झोंक दी है। उन्होंने यहां आने आवेदन कर दिया है। माइक-1 ने माइक-2 के पीछे विरोधियों को लगा दिया है। इस जोड़तोड़ में किसका पलड़ा भारी पड़ता है, इसका परिणाम तो अक्टूबर-नवंबर के बीच आएगा।

नाैसिखियाें के भराेसे सरकारः बड़ी कचहरी में इन दिनों सरकार नौसिखियों के भरोसे खड़ी हो रही है। आए दिन नौसिखियों को लेकर खिंचाई हो रही है, लेकिन सुधार पर ध्यान नहीं है। न्यायालय में सरकार का पक्ष रखने के लिए 40 काले कोर्ट वालों की नियुक्ति बीते दिनों की गई है। करीब 90 लोगों को पैनल में रखा गया है। इनके कंधों पर पक्ष रखने की जिम्मेदारी है, वह अंत की फाइलें अलॉट करा रहे हैं। मुख्य मोर्चे पर पैनल को तैनात कर रहे हैं। इस पैनल में नौसिखियों की आमद ज्यादा है। इस वजह से आए दिन बड़ी कचहरी में सरकार की खिंचाई हो रही है। इसका खामियाजा अधिकारी भुगत रहे हैं, शिकायतें भी करने लगे हैं। चर्चा तो ये है कि कामकाज बांटा जा रहा है, वह बाबुओं के भरोसे है। एक केस के लिए मोती महल में पांच-पांच काले कोट वाले भेजे जा रहे हैं।

Posted By: vikash.pandey

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