Gwalior Business News: ग्वालियर.नईदुनिया प्रतिनिधि। कोविड-19 के रहते शिपिंग कंपनियों ने ओसन फ्रेट में बेतहाशा बढ़ोत्तरी के कारण ग्वालियर अंचल के एमएसएमई निर्यातकों को हो रही परेशानियोंको लेकर एमपीसीसीआई ने केन्द्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री- पीयूष गोयल, केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, केन्द्रीय कृषि मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर, सांसद विवेकनारायण शेजवलकर सहित डायरेक्टर जनरल, डीजीएफटी, नई दिल्ली को पत्र लिखकर भाडा नियंत्रण के लिए पत्र लिखा है। जिससे अपने माल का निर्यात करने वाले निर्यातक/एमएसएमई उद्यमी अपना कारोबार सुचारू रूप से संचालित कर, प्राप्त ऑर्डर की आपूर्ति कर सकें ।

एमपीसीसीआई, अध्यक्षविजय गोयल, मानसेवी सचिव डॉ. प्रवीण अग्रवाल ने प्रेस को जारी विज्ञप्ति में अवगत कराया है कि कोविड-19 से पूर्व भारत से माल निर्यात करने पर जिन शिपिंग कम्पनीज द्वारा वेस्ट अफ्रीका का भाड़ा लगभग 1500 डॉलर प्रति कन्टेनर (40 फीट) लिया जाता था, वहीं वर्तमान में शिपिंग कम्पनीज द्वारा इसे बढ़ाकर इसकी दरें 7 हजार डॉलर से लेकर 11 हजार डॉलर तथा दुबई के लिए कोविड से पूर्व कन्टेनर 50 डालर में मिल जाता था, वहीं अब कंटेनर के लिए एक हजार डालर तक का शुल्क वसूल किया जा रहा है, जिसके परिणाम स्वरूप देशभर के एमएसएमई निर्यातकों को अपने उत्पाद का निर्यात करने में काफी परेशानी आ रही है। इससे देश के निर्यातकों को ऑर्डर की सप्लाई की आपूर्ति करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।

पदाधिकारियों ने कहा है कि कन्टेनर्स के भाड़े में अत्याधिक वृद्धि का सबसे बड़ा कारण शिपिंग कम्पनीज द्वारा अपने जहाजों का नियमित रूप से संचालन नहीं किया जाना है। भाड़े में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई गुना हुई बढ़ोत्तरी के कारण ग्वालियर अंचल के निर्यातक सहित देश भर के एमएसएमई/निर्यातकों को अपने माल का निर्यात करने में समस्याएँ सामने आ रहीं हैं । एमपीसीसीआई ने माँग की है कि शिपिंग कंपनी पर नियंत्रण हेतु एक अथॉरिटी का नियंत्रण हो, जिससे वह अपनी मर्जी से भाड़े की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि नहीं कर सकें। साथ ही, शिपिंग कम्पनीज के अधिकारियों के साथ बैठक कर, जहाजों का पूर्व की भांति नियमित संचालन भी सुनिश्‍चित कराया जाए, जिससे कि कन्टेनर आसानी से जा सके और आ सके ।

पदाधिकारियों ने कहा है कि माल के निर्यात के भाड़े की बढ़ती हुई कीमतों को यदि नियंत्रण नहीं किया गया, तो इससे देश के निर्यात पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और इससे देश की इकोनॉमी बुरी तरह से प्रभावित होगी । हमारे पड़ौसी देश चीन एवं अन्य देश जैसे तर्की की सरकारों द्वारा निर्यात से संबंधित सभी प्रकार के खर्चों जिसमें कि शिपिंग सहित कंटेनर का भाड़ा भी शामिल है, अपने संज्ञान में रखा जाता है । इसके परिणाम स्वरूप आज चीन काफी मात्रा में अपने यहाँ से माल का निर्यात दुनिया के विभिन्न देशों को कर रहा है ।

Posted By: anil.tomar

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