अजय उपाध्याय, ग्वालियर Gwalior Corona Update । जिला अस्पताल मुरार में 34 डॉक्टरों की टीम है, लेकिन किसी को वेंटिलेटर लगाना नहीं आता है। दो दिन पहले वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं मिलने के कारण एक कोरोना मरीज की मौत भी हो चुकी है। जबकि वेंटिलेटर सीएमएचओ स्टोर में रखे धूल खा रहे हैं। प्रशासन ने आइसीयू के लिए भी संसाधन उपलब्ध कराए, लेकिन आइसीयू चालू अब तक नहीं हुआ। यहां कोरोना मरीज केवल ऑक्सीजन के सहारे हैं। उधर जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 52 वेंटिलेटरों पर धूल की परत जम चुकी है। क्योंकि इनका आज तक उपयोग ही नहीं हुआ है।

जब कोरोना का खतरा बढ़ा तो शासन ने जिला अस्पताल मुरार को 4 वेंटिलेटर उपलब्ध कराए थे। जिनको सीएमएचओ स्टोर में रखा गया था। 6 माह से यह वेंटिलेटर वहीं रखे-रखे धूल खा रहे हैं। 34 डॉक्टरों की टीम होते हुए भी कोई वेंटिलेटर का संचालन करना नहीं जानता है। इसी वजह से इनका उपयोग ही नहीं हो रहा है।

दो दिन पहले मोतीझील निवासी 64 वर्षीय जुगल किशोर की भी जिला अस्पताल मुरार में वेंटिलेटर के अभाव में मौत हो गई थी। डॉक्टर मरीज को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखे हुए थे। जब हालत बिगड़ी तो सुपर स्पेशियलिटी रेफर करने का विचार किया, लेकिन वहां पर बेड खाली नहीं थे। इसलिए मरीज को अस्पताल में ही ऑक्सीजन पर रखा गया और मरीज ने दम तोड़ दिया। यदि मरीज को वेंटिलेटर सपोर्ट मिल जाता तो शायद जान बच सकती थी।

केवल 12 वेंटिलेटर का हुआ उपयोग

जेएएच के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल में 64 वेंटिलेटर हैं। यहां पर पूरे अंचल से गंभीर मरीज आते हैं और सभी बेड लगभग फुल हैं। यहां विशेषज्ञों की टीम है, वेंटिलेटर भी हैं, लेकिन उपयोग केवल 12 का ही हुआ है। 52 वेंटिलेटर धूल खा रहे हैं।

सुपर स्पेशियलिटी में इंतजाम

-178 बेड का अस्पताल

-178 ऑक्सीजन

-64 वेंटिलेटर

-12 वेंटिलेटर का अब तक उपयोग हुआ

-52 वेंटिलेटर अब तक शोपीस की तरह रखे हुए हैं।

जिला अस्पताल मुरार में इंतजाम

-80 बेड कोरोना मरीजों के लिए आरक्षित

-80 ऑक्सीजन

-4 वेंटिलेटर सीएमएचओ स्टोर में रखे धूल खा रहे हैं।

डॉक्टरों की स्थिति:-

-34 डॉक्टरों का स्टाफ है

-12 डॉक्टर कोविड ड्यूटी में लगे हैं

-1 राजनीतिक रसूख के चलते कभी-कभी ही अस्पताल आते हैं।

-2 सैंपलिंग में ड्यूटी कर रहे हैं।

-3 कोरोना ग्रस्त हैं

-3 सीएमएचओ कार्यालय में अटैच हैं

- वेंटिलेटर चालू करवाने के निर्देश दिए है। जिससे गंभीर मरीजों को जिला अस्पताल में भी इलाज मिल सके। अन्य जो खामियां है, उन्हें जल्द दूर करने का प्रयास कर रहे हैं। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह , कलेक्टर

- जिला अस्पताल से मरीज को रेफर करते हैं तो सुपर स्पेशियलिटी से बेड फुल होने का कहकर लौटा दिया जाता है। जेएएच से जिला अस्पताल एक महिला को भेजा गया, जिसके पैर में पस(मवाद) पड़ गया था। महिला की बाद में मौत भी हो गई। वेंटिलेटर तो हमारे यहां हैं, लेकिन एमडी एनएसथिसिया नहीं होने के कारण उपयोग नहीं हो पाता है। - डॉ डीके शर्मा, सिविल सर्जन, मुरार जिला अस्पताल

Posted By: Sandeep Chourey

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