- कस्बों के छोलाछाप डाक्टरों के यहां भीड़

Gwalior Corona Virus News: ग्वालियर. नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना से शहर से ज्यादा गांव के हालात खराब हो सकते हैं। गांव में फैला खांसी, झुकाम, बुखार का संक्रमण इस ओर इशारा कर रहे हैं, लेकिन गांव में सैंपलिंग नहीं होने से वास्तविकता सामने नहीं आ पा रही है। अलग-अलग गांव के लोगों से नईदुनिया ने वास्तविकता पूछी तो उनका कहना था कि एसा कोई घर बाकी नहीं है, जिसमें बुखार, खांसी व झुकाम का मरीज खटिया पर नहीं रखा है। गांव के लोगों के लोगों का झोलाछाप डाक्टर इलाज में सहारा बने हैं। सुबह के समय इन डाक्टरों के यहां भारी भीड़ हो रही है। पिपरौआ, बामरोल, घाटमपुर, बनवार, हिम्मतगढ़, अमरोल के लोगों से वास्तविकता पता की। यह हमारे गांव की अकेली की कहानी नहीं है। हर गांव में एसी ही स्थिति है।

एक दिन ही हो सकी सैंपलिंग

- भितरवार ब्लाक के ईटमा गांव में एक मौत के बाद प्रशासन का ध्यान गांव की ओर गया। इस गांव में गत दिवस सैपलिंग कराई गई थी। रेपिड एंटीजन में करीब 250 लोगों में 61 लोग पाजिटिव पाए गए। मौके पर जाने वाली टीम यह कहते शाम लौट गई थी कि 5 मई को फिर से सैंपलिंग के लिए एंगे।

- इस गांव के लोग 5 मई को स्वास्थ्य अमले का इंतजार करते रहे, लेकिन सैंपलिंग के लिए कोई नहीं पहुंचा। करीब 5 हजार की बादी है। अभी 80 फीसद बादी की सैंपलिंग बाकी है।

गांव में कोविड-19 फैलने के सबसे बड़े ये कारण

- गांव में पानी सार्वजनिक हैंडपंपों से भरा जाता है। इन पर दिनभर महिला, पुरुष व बच्चों की भीड़ रहती है। यही स्थिति कुओं की है।

- चौपाल पर बैठने का चलन रहता है। देर शाम से बुजुर्ग व युवा चौपालों पर बैठने लगते हैं। इस दौरान न मास्क रहता है और न सेनेटाइजर।

- लोगों में कोविड-19 को लेकर जागरूकता कम है। खांसी-झुकाम, बुखार के व्यक्ति से दूरी नहीं बना रहे हैं।

- कोविड-19 को लेकर जो किट बनाई गई है, वह लोगों तक नहीं पहुंच पा रही है।

6लाख की अाबादी पर यह व्यवस्थाएं

- ग्रामीण क्षेत्र की अाबादी करीब 6 लाख है। 256 पंचायतें में 552 गांव हैं। इन 6 लाख लोगों के सैंपलिंग के लिए ब्लाक स्तर पर कोविड-19 सेंटर बनाए गए हैं। ये सेंटर गांव से 40 किमी दूर हैं।

-360 बेड के क्वारेंटाइन सेंटर बनाए गए हैं। यह डबरा व भितरवार में है।

- 1200 लोगों के सैंपल लेने की क्षमता है। जिले में सात फीवर क्लीनिक संचालित हैं।

- शहर में कोविड-19 की दवाइयों की किट दी जा रही है, लेकिन अभी गांव में यह किट नहीं पहुंची है। अभी सिर्फ तैयार चल रही है।

- पटवारी, पंचायत सचिवों का संपर्क नहीं है। वास्तविक स्थिति को ऊपर तक नहीं पहुंचा रहे हैं। लोगों के पास एसा कोई नहीं है, जहां वह संपर्क कर सकें।

- सैंपल के लिए चार मोबाइल यूनिट है।

इनका कहना है

- गांव में जो लोग डाक्टर की प्रेक्टिस कर रहे हैं, उनकी मीटिंग बुला रहे हैं। उन्हें बताया जाएगा कि कोविड-19 से संबंधित दवाइ लोगों को देना शुरू करे। कोविड को गांव में फैलने से रोकने के लिए सख्ती बढ़ा रहे हैं। सैंपलिंग भी बढाई जा रही है। निरीक्षण शुरू कर रहे हैं।

किशोर कान्याल, सीईओ जिला पंचायत

इनका कहना है

- हमारे गांव में एेसा कोई घर नहीं है, जिममें खांसी झुकाम व बुखार का मरीज नहीं है। अासपास के गांव में भी एेसी ही स्थिति है। पड़ोस के गांवों से मौत की खबरें भी आ रही हैं।

उत्तम सिंह, निवासी पिपरौआ

- हर गांव की स्थिति एक जैसी है। बुखार, खांसी, झुकाम, फैला हुआ है। किसी का तो पूरा परिवार भी बुखार, खांसी, झुकाम से पीड़ित है। सैंपल कराने कहां जाएं, यह जानकारी नहीं है।

महिप रावत, हिम्मतगढ़ पंचायत

Posted By: anil.tomar

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