Coronavirus Gwalior News: ग्वालियर। नईदुनिया प्रतिनिधि। शहर में पहली बार कोरोना वैक्सीन के दोनों डोज लगवाने के दो माह बाद कंपू थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक रामकुमार शुक्ला की कोरोना से बुधवार को अस्पताल में मौत हो गई। प्रधान आरक्षक को ब्लैक फंगस की आशंका भी जताई जा रही है। इलाज करने वाले डाक्टर का कहना है कि प्रधान आरक्षक की मौत का कारण हैप्पी हाइपोक्सिया है। मरीज के फेफड़ों में संक्रमण था, जिसके चलते उसे हाइफ्लो आक्सीजन पर 20 लीटर आक्सीजन दी जा रही थी, तब उसका आक्सीजन लेवल 80 के आसपास आ रहा था। बुधवार की सुबह करीब 10 बजे अचानक उनका आक्सीजन लेवल गिरा और मौत हो गई।

वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके थे

फ्रंट लाइनर रामकुमार शुक्ला ने कोरोना वैक्सीन का पहला डोज 13 फरवरी और दूसरा डोज 28 मार्च को लगवाया था। दो डोज लगने के बाद शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॉडी तैयार हो जाती है। अबतक ऐसा देखा गया था कि दो डोज लगने के बाद व्यक्ति संक्रमण का शिकार तो हुआ पर उसके फेंफड़ों में वायरस अधिक प्रभाव नहीं दिखा सका। यह पहला मामला सामने आया है कि कोरोना ने दो डोज लगने के बाद भी रामकुमार शुक्ला के फेफड़ों पर प्रभाव डाला।

खांसी से हुई शुरुआत

रामकुमार के बेटे पवन का कहना है कि 11 दिन पहले उन्हें खांसी की समस्या हुई थी। तब एक निजी डाक्टर से इलाज लिया। जब फायदा नहीं मिला तो तीन मई को आरटीपीसीआर जांच कराई जो निगेटिव आई। इसके बाद परेशानी लगातार बढ़ती गई तब उन्हें पांच मई को जेएएच के कैजुअल्टी वार्ड में लेकर पहुंचे, जहां रैपिड एंटीजन की रिपोर्ट पाजिटिव आने पर सुपर स्पेशियलिटी हास्पिटल में भर्ती कर दिया गया। वहां तीन दिन भर्ती रहे पर स्वास्थ्य लाभ दिखाई नहीं होने पर उन्हें एक निजी अस्पताल इंडक्स में भर्ती किया गया। जहां 11 मई तक इलाज चला। इस बीच उनकी आंखों में सूजन आ गई थी। इसके बारे में कई बार डाक्टर को बताया पर उन्होंने आंख पर आ रही सूजन दवाओं के हाई डोज देने का कारण बताया। पिता की एक आंख पलक में काफी सूजन आने से बंद हो चुकी थी, जब स्वास्थ्य अधिक खराब होता देखा तो उन्हें पुलिस की मदद से डिस्चार्ज कराकर सिम्स अस्पताल में भर्ती किया, जहां उनकी मौत हो गई।

इनका कहना

मंगलवार की शाम मरीज भर्ती हुआ था। मरीज आक्सीजन सपोर्ट पर था और उन्हें फेफड़ों में संक्रमण होने से आक्सीजन लेवल काफी काम आ रहा था। 20 लीटर आक्सीजन देने पर उनका आक्सीजन लेवल 80 के आसपास आ रहा था। सुबह के समय अचानक आक्सीजन लेवल गिरने से मौत हो गई। इसे हैप्पी हाइपोक्सिया से मौत होना कहा जा सकता है। ब्लैक फंगस के बारे में नहीं कहा जा सकता, क्योंकि इतना समय नहीं मिला कि इसकी जांच कराई जाती।

डा.अनुराग सिकरवार, इलाज देने वाले डाक्टर, सिम्स अस्पताल

प्रधान आरक्षक जब से अस्पताल में भर्ती हुए तभी से उनकी मानीटरिंग की जा रही थी। उन्हें वैक्सीन के दोनों डोज लग चुके थे। इलाज चल रहा था पर स्वास्थ्य में लाभ नहीं हुआ और अचानक से उनकी मौत हो गई। डाक्टर के अनुसार उन्हें ब्लैक फंगस की शिकायत नहीं थी।

हितिका वासल, प्रभारी एसपी ग्वालियर

Posted By: anil.tomar

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