Gwalior corona Virus News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। कोरोना सैंपलिंग के फर्जीवाड़े में शासन को पिछले 20 दिन में डेढ़ करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। यह नुकसान व्यक्तियों की दो-दो पद्धतियों से जांच कर किया गया। करीब 800 से अधिक लोगों की हर दिन दोहरी जांच की गई, जिस कारण 20 दिन में 16 हजार किट खराब हुई। यह फर्जीवाड़ा नहीं होता तो 16 हजार लोगों की जांच हो जाती। यह जांच निजी पैथलाजी में भी सिर्फ 48 लाख रुपये में हो सकती थी, जबकि इस पर एक करोड़ 12 लाख रुपये अतिरिक्त खर्च का अनुमान है। बिना मेहनत किए सैंपलिंग के आंकड़ों को बढ़ाने का खेल पिछले 20 दिन से स्वास्थ्य विभाग का सैंपलिंग अमला खेल रहा था। अमले ने हजारों ग्रामीणों की पहले रैपिड एंटीजन टेस्ट किया फिर उन्हीं की आरटीपीसीआर जांच करा दी। इसकी पुष्टि शासन द्वारा जारी सैंपलिंग सूची की एक्सल शीट से हुई है। आइसीएमआर की गाइडलाइन का हवाला देते हुए नोडल अधिकारी डा. अमित रघुवंशी यह बात स्वीकार कर चुके हैं कि जिन लोगों का हमने रैपिड टेस्ट किया उन्हीं की आरटीपीआर के लिए भेजी।

सैंपलिंग में फर्जीवाड़ाः 800 से अधिक लाेगाें की हर दिन काेराेना की दाेहरी जांच हुईः

-30 कर्मचारी कार्यरत हैं ग्रामीणों की जांच के लिए गठित टीम में

-16 हजार किट खराब की गईं सैंपलिंग के फर्जीवाड़े में

सरकार की आर्थिक हानि को ऐसे समझेंः

जांच राशि सर्विस चार्ज सैंपल नुकसान

रैपिड एंटीजन टेस्ट 300 200 16000 48 लाख

आरटीपीसीआर 700 200 16000 1.12 कराेड़

सरकारी साधन-संसाधनाें का हुआ दुरुपयाेगः जिला अस्पताल से एमएमयू (माेबाइल मैनेजमेंट यूनिट) टीमाें काे ग्रामीण इलाकाें में सैंपलिंग के लिए भेजा गया। इन टीमाें में करीब तीस कर्मचारी कार्यरत हैं। जिन पर शासन हर माह पांच लाख रुपये वेतन के रूप में खर्च कर रहा है। इसके बाद भी टीम ने फर्जी तरीके से सैंपलिंग के आंकड़े को बढ़ाया और हजारों सैंपल किटों का नुकसान किया। दोहरी जांच के कारण जीआरएमसी लैब के संसाधनों व कर्मचारियों की मेहनत भी व्यर्थ गई।

(नोट: पैथोलॉजी संचालकों का कहना है कि आरटीपीसीआर की जांच मंहगी है, पर शासन ने इसके 700 रुपये निर्धारत किए, इसी दर से जांच की जा रही है।)

वर्जन-

काेराेना सैंपलिंग में फर्जीवाड़ा नहीं चलेगा। मैं अभी कलेक्टर को इस मामले को लेकर निर्देशित करता हूं कि जिन लोगों द्वारा इस तरह का फर्जीवाड़ा किया जा रहा है उसकी जांच कर तत्काल कार्रवाई करें। इस तरह शासन को राजस्व की क्षति व उद्देश्यों को बेकार नहीं होने दिया जाएगा।

प्रद्युम्न सिंह तोमर, कोविड रोकथाम प्रभारी ग्वालियर व ऊर्जा मंत्री मप्र शासन

Posted By: vikash.pandey

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