- तैयारी प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग बेड के साथ दवाओं की उपलब्धता को लेकर सचेत

ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। कोरोना की दूसरी लहर में मरीज केवल वायरस से ही नहीं लड़ा। इसके साथ में वह बेड, स्टाफ, आक्सीजन और सबसे महत्वपूर्ण दवाओं की कमी से भी जूझा। जिस तरह से प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग तीसरी लहर की आशंका के चलते आक्सीजन और बेड की उपलब्धता करा रहा है। ठीक उसी प्रकार से इस बार दवाओं की उपलब्धता को लेकर सचेत है। क्योंकि पिछली बार अप्रैल में दूसरी लहर अपने चरम पर पहुंच चुकी थी, लेकिन दवा स्टोर में दवा की कमी थी। लोग रेमडेसिविर, फेवीफ्ल्यू, टॉक्लीजुमेव के अलावा विटामिन सी, एजिथ्रोमाइसिन, मल्टीविटामिन आदि दवाओं के लिए जूझ रहे थे।

दूसरी लहर में जीवन रक्षक दवाओं के रुप में रेमडेसिविर, फेवीफ्ल्यू, टॉक्लीजुमेव दवाओं को माना जा रहा था, लेकिन इनकी कमी के चलते कालाबाजारी शुरू हो गई थी। अस्पताल में जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ रहे अपनों को बचाने के लिए लोगों ने इन दवाओं को चार गुना दाम पर खरीदा। दवाओं की कालाबाजारी में दवा विक्रेता के साथ अस्पताल संचालक भी शामिल हुए। पुलिस ने एक अस्पताल संचालक को रेमडेसिविर इंजेक्शन की कालाबाजारी करते हुए पकड़ा भी था। इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए इन दवाओं की कालाबाजारी को रोकने के लिए प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने इस बार थोक व्यापारियों को 10 फीसद दवाएं और 20 फीसद सर्जीकल सामान का स्टाक रखने के निर्देश दे दिए हैं और सरकार ने रेमडेसिविर इंजेक्शन प्रोटोकॉल से ही अलग कर दिया है।

दवा व सर्जीकल सामान पहले से ही स्टाक करने के निर्देश प्रशासन की ओर से मिले हैं। केरल व महाराष्ट्र में तीसरी लहर दस्तक दे चुकी है। वहां से पता किया जा रहा है कि कौन-कौन सी दवाओं की डिमांड बढ़ रही है। उसी हिसाब से स्टाक किया जा सके, लेकिन इस बार रेमडेसिविर इंजेक्शन प्रोटोकाल से हट चुका है इसलिए इसका स्टाक नहीं होगा। बाकी दूसरी लहर में जो बेसिक दवाएं थीं उनका स्टाक किया जा रहा है।

विकास दमानी, संचालक राज मेडिकल

दूसरी लहर में सरकारी अस्पतालों में तो शासन स्तर से दवाओं की उपलब्धता कराई गई, लेकिन निजी अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के सामने दवाई को लेकर समस्या खड़ी हो गई थी। जिसके चलते इस बार पहले से ही दवा का स्टाक करने के प्रशासन की ओर से व्यापारियों को निर्देश दिए गए हैं।़डिा. मनीष शर्मा, सीएमएचओ

दूसरी लहर में अस्पतालों का हाल

जयारोग्य अस्पताल: जयारोग्य अस्पताल में 20 अप्रैल को 500 रेमडेसिविर इंजेक्शन का स्टाक उपलब्ध हुआ था। इसके बाद रेमडेसिविर व अन्य आवश्यक दवाओं की उपलब्धता शासन, प्रशासन द्वारा जेएएच को कराई गई। लोग निजी अस्पताल की अपेक्षा सरकारी अस्पताल में सिर्फ इसलिए भर्ती होना चाहते थे कि यहां पर रेमडेसिविर इंजेक्शन उन्हें निशुल्क व आसानी से उपलब्ध हो जाएगा।

जिला अस्पताल: जिला अस्पताल में रेमडेसिविर इंजेक्शन की उपलब्धता कराई गई। जहां पर भर्ती मरीजों को इंजेक्शन उनकी गंभीरता के हिसाब से डाक्टरों ने उपलब्ध कराए। इसलिए दूसरी लहर में जिला अस्प्ताल के 100 बेड एक मिनट के लिए खाली नहीं रहे।

निजी अस्पतालों में भी रही समस्या: सरकारी अस्पताल में दवा की उपलब्धता पर शासन ,प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने पूरा ध्यान दिया, लेकिन समस्या उन मरीजों के साथ रही जिन्हें सरकारी अस्पताल में प्रवेश नहीं मिला और मजबूरी में वह निजी अस्पताल की दहलीज चढ़ गए। यहां पर मरीज भर्ती करने के बाद रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए संघर्ष करना पड़ा। काफी लोगों ने तो ब्लैक में इंजेक्शन खरीदकर अपने मरीज को दिलाए।

प्रशासन ने यह रखी थी व्यवस्था

प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग ने निजी अस्पताल में भर्ती मरीजों को इंजेक्शन व दवाई की उपलब्धता हो इसके लिए ड्रग इंस्पेक्टर को जिम्मेदारी दी थी। रेमडेसिविर इंजेक्शन के लिए निजी अस्पताल के डाक्टर की मांग और मरीज के पर्चे पर उपलब्धता सुनिश्चित की गई, लेकिन इसमें कुछ निजी अस्पताल कालाबाजारी करने लगे थे।

अबकी बार पहले से ही दवाओं की उपलब्धता़

प्रशासन ने दूसरी लहर से सबक लेकर इस बार तीसरी लहर आने से पहले थोक व खेरीज विक्रेताओं की बैठक की। जिसमें उन्होंने व्यापारियों को अपने स्टाक के हिसाब से 10 फीसद दवा और 20 फीसद सर्जीकल सामान जैसे ऑक्सीमीटर, मास्क, सैनिटाइजर, नेमुलाइजर आदि का स्टाक रखने के निर्देश दिए हैं।

Posted By: anil.tomar

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