अजय उपाध्याय, ग्वालियर। Gwalior Coronavirus News: सितंबर के महीने में कोरोना की रफ्तार में तेजी आई है। सरकारी बुलेटिन के मुताबिक 21 सितंबर तक शहर में चार हजार से अधिक संक्रमित मरीज मिले हैं। इस दौरान एक चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है। सितंबर के दूसरे व तीसरे सप्ताह में शहर के 256 मरीज सरकारी रिकार्ड से गायब हैं। इन मरीजों ने कोविड टेस्ट तो कराया, लेकिन पॉजिटिव रिपोर्ट आते ही लापता हो गए। इनको अस्पताल पहुंचाने के लिए जब प्रशासन की टीम ने संपर्क किया तो इनके मोबाइल बंद मिले। कुछ मामलों में गलत नंबर दर्ज किए गए थे। इसके बाद जब पर्चे पर लिखे पते पर टीम पहुंची तो उस नाम का कोई व्यक्ति ही नहीं मिला। अब आशंका है कि ये लोग आमजन के बीच संक्रमण तो नहीं फैला रहे हैं। यह सभी मरीज प्रशासन के पोर्टल पर अनट्रेक खाते में दर्ज हैं।

मार्च में जब कोरोना संक्रमण फैला तो आइसीएमआर की गाइड लाइन के मुताबिक केवल ट्रेवल हिस्ट्री, कॉटेक्ट हिस्ट्री या लक्षण होने पर ही जांच की जाना थी। फिर बदलाव हुआ और हर व्यक्ति की जांच की जाने लगी। इसके लिए मरीज को अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर और आधार कार्ड देना अनिवार्य किया गया था। संदिग्ध जब टेस्ट कराने के लिए निर्धारित अस्पताल में जाता है तो सभी जानकारी ली जाती है। फिर मोबाइल नंबर पर एक ओटीपी आता है। वर्तमान में जिन संस्थानों में सैंपलिंग हो रही है, वहां स्वास्थ्यकर्मी को जब संदिग्ध मोबाइल न होने की बात कहता है तो झंझटों से बचने के लिए वह उसे स्किप कर देते हैं। इससे मरीज की पूरी जानकारी फीड नहीं होती है। यहीं से गड़बड़ी शुरू होती है। इसी वजह से प्रशासन की टीम इन मरीजों को तलाश ही नहीं पाती है।

इस गड़बड़ी के संबंध में डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि डॉ. एमएस राजावत का कहना है कि कुछ लोग अपना मोबाइल नंबर और पता गलत दर्ज करा देते है। कुछ मामलों में ऑपरेटर स्किप कर मरीज द्वारा बताई आधी-अधूरी जानकारी अपलोड कर देते हैं। स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बिन्दु सिंघल का कहना है कि जिन मरीजों तक हम नहीं पहुंच पाते हैं, उनकी सूची इंसीडेंट कमांडरों के गु्रप पर भेज दी जाती है। इससे वह ऐसे मरीजों को तलाश सकें। हालांकि कई बार कुछ लोगों का नाम, पता व मोबाइल नंबर गलत होने से उन तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

कुछ मरीज अपना नाम, पता व मोबाइल नंबर गलत दर्ज करवा देते हैं। इससे परेशानी आती है। लोगों से अपील भी की गई है कि वह सही नाम पता व मोबाइल नंबर ही दर्ज कराएं, जिससे उन्हें समय पर सही इलाज मिल सके। ऐसे काफी मरीज हैं, जिन तक नहीं पहुंचा जा सका है।- कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर

Posted By: Nai Dunia News Network

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