ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि) Gwalior Coronavirus News। कोरोना का सितम सबसे अधिक सितंबर में देखने को मिला। इस माह 5080 संक्रमित मिले और करीब 102 लोग मौत के शिकार हुए। कोरोना के यह आंकड़े शहरवासियों को डराने वाले हैं। शहर में कोरोना का पहला मामला मार्च में मिलने के बाद ऐसा माना जा रहा था कि सख्ती व लोगों की सावधानी से यहां कोरोना के गिने-चुने मामले ही सामने आएंगे, लेकिन संक्रमितों का ग्राफ लगातार बढ़ता ही चला गया। जुलाई अगस्त में 62 हजार जांच में 5112 मरीज पाए गए। वहीं सितंबर के 29 दिन में हुए 29 हजार 663 सैंपल में ही 5080 केस सामने आए,जो पिछले माह में मिलने वाले संक्रमितों के आंकड़ों से अधिक हैं। जबकि मार्च से लेकर जून तक महज 393 मरीज ही पाए गए थे।

अगस्त की लापरवाही सितंबर में नजर आई

20 अगस्त से राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने शहर में डेरा डालना शुरू कर दिया था। हाई कोर्ट के आदेश के बाद भी राजनीतिक दलों के कार्यक्रमों में हजारों लोगों की भीड़ जुटी। इसमें मास्क लगाने व सुरक्षित शारीरिक दूरी रखने जैसे नियमों का पालन नहीं हुआ। राजनेताओं ने तब न तो खुद मास्क व शारीरिक दूरी का पालन किया और न ही इसका पालन कराया। धरना-प्रदर्शन जैसे घटनाओं में लोग एक-दूसरे के संपर्क में आए और कोरोना को बढ़ावा मिला, जिसका असर सितंबर में संक्रमितों के आंकड़ों में देखने को मिला।

यहां हुई चूक और बढ़ गए मरीज

जिला प्रशासनः जून में अनलॉक वन की शुरुआत के साथ बाजार में भीड़ लगना शुरू हो गई। पुलिस-प्रशासन की सख्ती कम हुई तो लोग मास्क व सुरक्षित शारीरिक दूरी का पालन भी भल गए। वहीं अगस्त में जिला प्रशासन ने राजनीतिक कार्यक्रमों को इजाजत देकर कोरोना को पैर पसारने का खुला निमंत्रण दे दिया।

स्वास्थ्य विभागः शुरुआत में कोरोना मरीज मिलने पर उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती कर पूरी सतर्कता के साथ उसका इलाज किया गया। कंटेनमेंट जोन बनाए, पॉजिटिव की संपर्क हिस्ट्री तैयार कर संदिग्धों की जांच करवाई। अगस्त आते-आते यह सतर्कता गायब हो गई, जिससे अस्पतालों में मरीज बढ़ गए। ऐसे में संक्रमितों को घर पर आधा-अधूरा इलाज तो दिया, पर संपर्क हिस्ट्री से दूरी बना ली।

628 संक्रमित गायबः जुलाई से 20 सितंबर के बीच करीब 628 कोरोना संक्रमित मरीज गायब हो गए, जिन्हें प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग नहीं तलाश सका। इनसे शहर में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ा।

जनताः लॉकडाउन में लोगों ने हर नियम का पूरी सतर्कता से पालन किया, लेकिन अनलॉक में बाजार खुलते ही कोविड नियमों को मजाक समझ लिया। इसी लापरवाही के कारण कोरोना को पैर पसारने का मौका मिला और धीरे-धीरे शहर का हर वार्ड संक्रमण की चपेट में आ गया।

मार्च से सितंबर तक इस तरह बढ़ा कोरोना का ग्राफ

सात माह की औसत संक्रमण दर 8.7%

मार्च से लेकर सितंबर तक 1लाख 21हजार 722 सैंपलों में 10592 संक्रमित पाए गए। इस सात माह में औसत पॉजिटिविटी दर 8.7 प्रतिशत रही। वहीं सिर्फ सितंबर में यह दर 17 प्रतिशत को पार कर गई है।

कोरोना कुछ नहीं कर सकेगा,इस धारणा ने लोगों को लापरवाह बना दिया। जांच में देरी से संक्रमण घातक हुआ और संक्रमण बढ़ने के साथ लोग मौत के शिकार बने। आज के समय में मास्क ही वैक्सीन है। मास्क,शारीरिक दूरी व सैनिटाइजेशन का ध्यान रखें तभी कोरोना से बचा जा सकता है। डॉ. मनीष शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

Posted By: Nai Dunia News Network

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