ग्वालियर (नईदुनिया प्रतिनिधि)। Gwalior Coronavirus News: कोरोना के बढ़ते संक्रमण और चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं के बावजूद स्वास्थ्य विभाग खाली बेड दिखाने के लिए आंकड़ों में बाजीगिरी कर रहा है। इस गड़बड़ी को नईदुनिया ने 15 सितंबर के अंक में ' स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में संक्रमण, रिकार्ड से एक हजार पॉजिटिव गायब" शीर्षक से खबर प्रकाशित की। इस मामले को कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने संज्ञान में लेकर सीएमएचओ डॉ वीके गुप्ता को नोटिस देकर पूछा-भर्ती मरीजों के आंकड़ों के हेरफेर कैसे हुआ। सात दिन में जबाव दें।

नईदुनिया के पर्दाफाश के बाद स्वास्थ्य विभाग ने रिकॉर्ड में अपने आंकड़ों को दुस्र्स्त कर लिया। 13 सितंबर को प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2095 मरीजों में से 721 मरीजों को होम आइसोलेट किया गया है, 572 मरीज निजी व सरकारी अस्पतालों में भर्ती हैं और 807 मरीजों को डिस्चार्ज कर होम क्वारंटाइन किया गया है। स्वास्थ्य विभाग के नये आंकड़ों पर विश्वास करें तो इस समय 2095 एक्टिव केसों पर सिर्फ 27 फीसद यानी 572 मरीज ही हॉस्पिटल में हैं। 807 मरीज एक्टिव केस में तो शामिल हैं, लेकिन न तो यह हॉस्पिटल में भर्ती हैं न ही घर में अलग से आइसोलेट हैं। इन्हें सात दिन में ही हॉस्पिटल से डिस्चार्ज कर होम क्वारंटाइन कर दिया गया है। जिससे पर्याप्त संख्या में खाली बेड दिखाए जा सकें। इस क्वारंटाइन पीरियड में मरीज अपने स्वजनों के साथ रह सकता है। वह सिर्फ घर से बाहर ही नहीं निकल सकता है। ऐसे में स्वजनों के बीच संक्रमण फैलने की आशंका है। स्वजन बाहर निकलते हैं तो यह संक्रमण और लोगों में भी फैल सकता है।

बेड संख्या खाली दिखाने जल्दी कर रहे डिस्चार्ज

दरअसल 2100 से ज्यादा एक्टिव केसों के बदले में निजी व सरकारी अस्पतालों में 1329 बेड ही उपलब्ध हैं। क्वारंटाइन सेंटर मिलाकर कुल 1458 बेड हैं। होम आइसोलेट 40 प्रतिशत मरीजों को ही किया जाता है। ऐसे में खाली बेड दिखाने के लिए मरीजों को 7 दिन के अंदर डिस्चार्ज कर होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। आइसीएमआर की गाइडलाइन के अनुसार संक्रमित को 10 दिन के बाद ही पॉजिटिव की सूची से बाहर किया जाता है।

आइसोलेशन और क्वारंटाइन में है फर्क

जब मरीज को होम आइसोलेट किया जाता है तो उसे घर में अलग कमरे में रहना होता है। इस दौरान वह अपने स्वजनों के संपर्क में भी नहीं आ सकता है, जबकि होम क्वारंटाइन में अलग से कमरा और शौचालय होने की बाध्यता नहीं होती है। इसमें व्यक्ति अपने स्वजनों के साथ घुलमिल कर रह सकता है, सिर्फ उसके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी होती है।

एक्सपर्ट व्यू

जेएएच के पूर्व अधीक्षक डॉ.एसएम तिवारी का कहना है कि यदि किसी मरीज का ऑक्सीजन सैचुरेशन 95 से अधिक है और अन्य कोई लक्षण नहीं है तो उसे होम आइसोलेट कर सकते हैं। लेकिन उसे परिवार के अन्य सदस्यों से अलग रहना होता है। यदि 7 दिन बाद ही परिवार के संपर्क में आएंगे तो दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। पॉजिटिव आने के बाद कम से कम 14 दिन अलग से आइसोलेट रहना जरूरी है। यह बात लोगों को खुद समझना चाहिए। संक्रमण जिस तरह से बढ़ रहा है, अब लोगों को खुद ही अपनी सुरक्षा की जिम्मेदारी लेना होगी।

आपदा काल में कोविड मरीजों के आंकड़ों में हेरफेर गंभीर लापरवाही है। सीएमएचओ को कारण बताओ नोटिस भेजा जा रहा है। जबाव देने के लिए उन्हें सात दिन का समय दिया जाएगा। - कौशलेंद्र विक्रम सिंह, कलेक्टर ग्वालियर

Posted By: Prashant Pandey

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