- हाई कोर्ट ने परिवहन विभाग पर लगाया 20 हजार रुपये का हर्जाना

Gwalior Court News: ग्वालियर(नईदुनिया प्रतिनिधि)। हाई कोर्ट की एकलपीठ ने परिवहन विभाग के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसके आधार पर 28 दिसंबर 2015 के पहले खरीदी बसों के परमिट को रोक रहे थे। कोर्ट ने कहा कि नया नियम 28 दिसंबर 2015 के पहले खरीदी बसों पर लागू नहीं होगा। इन्हें पुराने नियम के अनुसार ही चलने की अनुमति होगी। परिवहन विभाग पर 20 हजार रुपये का हर्जाना भी लगाया है। हर्जाने की राशि 45 दिन में याचिकाकर्ता को भुगतान करनी होगी।

श्रीराम शर्मा ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नीरेंद्र शर्मा ने तर्क दिया कि विभाग ने 24 नवंबर 2010 को एक अधिसूचना जारी की थी। इस अधिसूचना में बसों की उम्र 20 साल निर्धारित की थी। 20 साल तक बस को चलाने का अधिकार था, लेकिन विभाग ने याचिकाकर्ता के परमिट को यह कहते हुए रोक दिया कि बस पुरानी है। 28 दिसंबर 2015 के नियम के अनुसार बस को 15 साल तक ही परमिट दिया जा सकता है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नया नियम 2015 के पहले खरीदी बसों पर लागू नहीं होगा। याचिकाकर्ता की बस पर भी यह नियम लागू नहीं है। हाई कोर्ट की इंदौर बैंच भी आदेश दिया जा चुका है कि 2015 के पहले खरीदी बसों पर नया नियम लागू नहीं होगा, लेकिन विभाग कोर्ट के आदेश को भी नहीं मानना रहा है। परमिट के लिए अपील भी की गई, लेकिन अपील को निरस्त कर दी। पहले विभाग जवाब को लेकर समय लेता रहा। विभाग की ओर से कहा गया कि नए नियम के तहत परमिट दिया जा सकता है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद विभाग पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है। साथ ही परमिट रोकने के आदेश को निरस्त कर दिया। 2015 के पहले खरीदी बसों पर पुराना नियम ही लागू होगा।

Posted By: anil.tomar

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