Gwalior Court News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। शिवपुरी के प्रधान आरक्षक को गलत जानकारी देना महंगा पड़ गया है। हाई कोर्ट की एकल पीठ ने प्रधान आरक्षक शिवकुमार श्रीवास्तव पर केस दर्ज करने का आदेश दिया है। जबकि शिकायतकर्ता पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है, जो याचिकाकर्ता को दिया जाएगा। पति को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं।

शिवपुरी निवासी सूर्यकांत भार्गव पर सिटी कोतवाली थाना शिवपुरी में दहेज प्रताड़ना व धारा 377 के तहत उनकी पत्नी ने केस दर्ज कराया। भार्गव ने मार्च में अग्रिम जमानत याचिका दायर की, तो उसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इसके बाद दाेबारा याचिका दायर की। उनकी ओर से तर्क दिया गया कि जिस तारीख को उसके खिलाफ महिला थाने में आवेदन देना बताया गया है, उस दिन आवक-जावक रजिस्टर में एंट्री नहीं है। जबकि पत्नी ने प्राप्ति पेश की। हाई कोर्ट ने इस मामले की जांच के आदेश शिवपुरी के पुलिस अधीक्षक को दिए। जब इस मामले की जांच की गई तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जिस दिन आवेदन देना बताया गया है, उस समय तक शिवपुरी में महिला थाना अस्तित्व में नहीं था। महिला सेल संचालित थी। आरक्षक राजकुमार श्रीवास्तव ने आवेदन की प्राप्ति दी है, वह सेल में पदस्थ नहीं रहा है। पुलिस अधीक्षक ने कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर बताया कि आरक्षक को लाइन अटैच कर दिया। हाई कोर्ट ने सूर्यकांत भार्गव को जमानत पर रिहा करने के आदेश दिए हैं, उनकी पत्नी पर 20 हजार रुपये का हर्जाना लगाया है, जाे उसके पति को दिया जाएगा।

ट्रायल कोर्ट ने जमानत देने में कोई गलती नहीं कीः हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें दुष्कर्म पीड़िता ने आरोपित की जमानत को खारिज करने की मांग की थी। कोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय ने जमानत देने में कोई गलती नहीं की है। गोला का मंदिर थाने में मनीष सिंह पर दुष्कर्म का केस दर्ज है। जिला न्यायालय से मनीष सिंह को जमानत मिल गई। उसकी जमानत को निरस्त कराने के लिए पीड़िता ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की। कोर्ट ने केस तथ्य देखे तो जमानत निरस्त करने का आधार नहीं बना, क्योंकि पीड़िता पूर्व से शादीशुदा थी। दो साल आरोपित के साथ रही और उससे बच्चा भी हुआ, उसने केस दर्ज करा दिया।

Posted By: vikash.pandey

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