Gwalior Court News: बलबीर सिंह, ग्वालियर नईदुनिया। व्यापम कांड की जांच व ट्रायल करते हुए सीबीआइ को आठ साल पूरे हो गए हैं। सीबीआइ ने इन आठ साल में 67 केसों की जांच कर कोर्ट में चालान पेश किए हैं। जिसमें 21 केसों की ट्रायल पूरी करा दी है। 21 में से 19 केस के आरोपितों को पांच-पांच साल तक की सजा मिली है, जबकि दो केस में आरोपित दोषमुक्त हुए हैं। व्यापम केस में सजा का अनुपात 90 प्रतिशत तक है। 10 प्रतिशत केसों में ही सजा नहीं हो रही है। सीबीआइ ने आरक्षक भर्ती घोटाले की एक और केस की ट्रायल पूरी कर ली है। महीने के अंत तक इसमें फैसला आ सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने जुलाई 2015 में व्यापम कांड की जांच सीबीआइ को सुपुर्द करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट का आदेश आने के बाद जुलाई के अंत तक एसआइटी ने व्यापम कांड के सभी केस सीबीआइ को ट्रांसफर कर दिए थे। अगस्त 2015 से सीबीआइ ने केसों की जांच शुरू की थी। ग्वालियर में कैंप आफिस भी बनाया था। सीबीआइ को व्यापम कांड जाए आठ साल हो गए हैं। हाई कोर्ट ने व्यापम कांड के केसों की ट्रायल के लिए तीन कोर्ट बनाए थे, लेकिन सीबीआइ की गति धीमी होने की वजह से दो कोर्ट बंद हो गए। अब एक कोर्ट ही संचालित है। विशेष कोर्ट ने अब तक 21 केसों में फैसला किया है।

नया कोर्ट हुआ है अधिसूचितः विशेष सत्र न्यायाधीश सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव का स्थानांतरण होने के बाद नया कोर्ट अधिसूचित हो गया है। व्यापम की सभी ट्रायलें अब विशेष सत्र न्यायाधीश अजय सिंह की कोर्ट में चल रही है। इस कोर्ट में ग्वालियर-चंबल संभाग के सभी केस भी इस कोर्ट में चल रहे हैं।

दो बड़े चालान नहीं हुए कमिटः

-पीएमटी कांड के दो बड़े चालान भी ट्रायल पर नहीं आ सके हैं, क्योंकि सीबीआइ ने चालान तो पेश कर दिया, लेकिन सभी आरोपितों को गिरफ्तार नहीं कर सकी, जिसकी वजह से चालान कमिट नहीं हो पा रहे हैं। न्यायिक मजिस्ट्रेट के यहां लंबित हैं।

-इन चालानों में व्यापम कांड के सबसे ज्यादा आरोपित हैं। इन केसों में आरोप तय होने में भी लंबा वक्त लगेगा। क्योंकि दोनों केसों में 300 के करीब आरोपित हैं।

-सीबीआइ ने आरोपितों के पिताओं को क्लीन चिट दी है। क्योंकि खातों में पैसे का लेनदेन नहीं होने के आधार पर पिताओं को बाहर निकला था।

इन केसों में आरोपित हुए हैं दोषमुक्तः

-पड़ाव थाना पुलिस ने 2012 में आरक्षक भर्ती घोटाले में 10 आरोपित पकड़े थे। इस केस की ट्रायल पुलिस करा रही थी, लेकिन सीबीआइ ने अतिरिक्त जांच कर खात्मा पेश कर दी थी, लेकिन कोर्ट ने मामले को संज्ञान में लेते हुए ट्रायल जारी रखी। आखिर में आरोपित दोषमुक्त हुए।

-पीएमटी कांड का एक आरोपित दोषमुक्त हुआ था, जिसकी सीबीआइ ने हाई कोर्ट में अपील दायर कर दी है।

वर्जन-

सीबीआइ व पुलिस की जांच में ज्यादा अंतर नहीं है, क्योंकि दोनों ही आइपीसी की धाराओं में जांच करते हैं। सीबीआइ ने व्यापम की जांच लंबे समय तक की, जिसकी वजह से साक्ष्य इकट्ठा करने के लिए समय मिल गया। सजा का अनुपात अधिक है।

भारत सिंह कौरव, पूर्व शासकीय अधिवक्ता

Posted By: vikash.pandey

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