Gwalior Court News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट की एकल पीठ में शासन की ओर से फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय खोलने के लिए एक कमेटी के गठन की जानकारी दी गई। यह कमेटी विश्वविद्यालय खोलने के संबंध में अध्ययन करेगी और दो महीने में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी। यह कमेटी गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा की अध्यक्षता में बनाई गई है। याचिका को 16 नवंबर को फिर से सुना जाएगा। मंगलवार को वीडियो कान्फ्रेंस के माध्यम से गृह विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश राजौरा, विधि विभाग के प्रमुख सचिव गोपाल श्रीवास्तव व डीजीपी विवेक जौहरी ने फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय के संबंध में कोर्ट के सवालों के जवाब दिए।

भरत जाटव पर शिवपुरी जिले के बदरवास थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज है। उसकी पहली जमानत याचिका डीएनए रिपोर्ट के आधार पर खारिज कर दी। अब उसने चौथी बार जमानत याचिका दायर की है। इस याचिका का निर्धारण किया जाना है। वर्तमान में डीएनए रिपोर्ट के लिए भोपाल व सागर लैब पर निर्भर रहना पड़ता है। इन रिपोर्ट को ध्यान में रखते हुए हाई कोर्ट ने फोरेंसिक साइंस विश्वविद्यालय खोलने का सुझाव दिया था। विश्वविद्यालय खुलने से नए वैज्ञानिक तैयार होंगे और नई तकनीक का भी इजाद होगा, लेकिन शासन ने इस दिशा में कार्य नहीं किया। कोर्ट ने फिर से यह याद दिलाया है। कोर्ट ने कहा कि अभी डीएनए सैंपल व फोरेंसिक साइंस एक्जामिनेशन को जांच में शामिल किया जा रहा है, जबकि तकनीक इससे कहीं ज्यादा आगे निकल चुकी है। कोर्ट ने अधिकारियों को तलब किया था। विश्वविद्यालय खोलने के लिए विशेषज्ञों की कमेटी बना दी है। कमेटी अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपेगी।

Posted By: vikash.pandey

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