Gwalior Court News: ग्वालियर, नईदुनिया प्रतिनिधि। हाई कोर्ट में सोमवार को उस याचिका पर अंतिम बहस नहीं हो सकी, जिसमें नगर निगम व नगर पालिका, नगर पंचायत अध्यक्षों के पद के आरक्षण पर रोक लगाई है। अब इस याचिका पर 21 जुुुलाई को सुनवाई संभावित है। हाई कोर्ट में निगम महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के पद आरक्षण को चुनौती देने के लिए पांच जनहित याचिकाएं दायर की हैं।

हाई कोर्ट ने मार्च में दो नगर निगम, 79 नगर पालिका, नगर पंचायत के आरक्षण की प्रक्रिया पर रोक लगाने के बाद शासन से जवाब मांगा था। 10 जून को इन याचिकाओं की सुनवाई चीफ जस्टिस की बैंच ने की थी। शासन का जवाब आने के बाद चीफ जस्टिस ने 21 जून अंतिम बहस की तारीख निर्धारित की थी। सोमवार को पांचों याचिकाएं अंतिम बहस के लिए लिस्ट थी, लेकिन कोर्ट में अंतिम सुनवाई नहीं हो पाने के कारण अगली तारीख निर्धारित की है। शासन ने अपने जवाब में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 243 व नगर पालिका अधिनियम की धारा 29 में नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायतों के जो अध्यक्ष चुने जाने हैं, उनके पदों के आरक्षण का अधिकार शासन को दिया है। अनुसूचित जाति व जनजाति के लिए जो पद आरक्षित किए जाते हैं, वह जनगणना के आधार पर तय किए जाते हैं। जनसंख्या के समानुपात के आधार पर आरक्षण किया जाता है। ऐसे नहीं है कि एक पद आरक्षित हो गया है, उसे दोबारा आरक्षित नहीं किया जा सकता। महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष व नगर पंचायत अध्यक्षों के पद आरक्षित करने में कोई गलती नहीं की है। कानून का पालन करते हुए आरक्षण किया गया है। ज्ञात हो कि मनवर्धन सिंह की जनहित याचिका पर आरक्षण पर रोक का आदेश दिया था।

Posted By: vikash.pandey

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